इंतज़ार, इबादत और तू

 **शीर्षक: इंतज़ार, इबादत और तू**


इंतज़ार, इबादत और तू

इंतज़ार की धूप में बैठा हूँ मैं,

तेरे आने की छाँव लिए,

हर पल जैसे थम-सा जाता है,

तेरी यादों के गाँव लिए।

ये वक़्त भी कितना अजीब है,

तेरे बिना गुजरता नहीं,

और तेरे साथ की ख्वाहिश में,

ये दिल कहीं ठहरता नहीं।

इबादत-सी लगती है अब तो,

तेरा नाम लेना हर बार,

जैसे कोई मंदिर की घंटी,

गूंजे दिल के भीतर हर बार।

मैंने हर दुआ में तुझे माँगा,

हर सजदे में तेरा ज़िक्र किया,

तेरी हँसी को खुदा समझकर,

अपना हर ग़म तुझ पर लिख दिया।

तू नहीं है पास मगर फिर भी,

हर जगह तेरा अहसास है,

जैसे हवा में तेरी खुशबू,

और धड़कनों में तेरा वास है।

इंतज़ार की रातें लंबी हैं,

नींदें आँखों से रूठ गईं,

तेरे बिना जो सुबहें आईं,

वो भी जैसे छूट गईं।

चाँद से पूछता हूँ अक्सर,

क्या तुझे भी उसकी खबर है?

क्या वो भी किसी खिड़की से,

मेरी तरह मुझे याद करती है?

तारों से बातें करता हूँ मैं,

तेरी यादों का हाल सुनाकर,

हर एक चमक में ढूँढता हूँ,

तेरा चेहरा झिलमिलाकर।

इबादत में अब फर्क नहीं,

तेरे और खुदा के बीच,

जब भी आँखें बंद करता हूँ,

दोनों का ही दीदार एक-सी।

तेरे नाम की तस्बीह लिए,

मैं हर रात गुजरता हूँ,

तेरी राहों में बिछकर जैसे,

खुद को ही बिखरता हूँ।

तू अगर आए कभी तो,

मेरी इस हालत को देखना,

कैसे तेरे इंतज़ार में मैंने,

खुद को ही खोया है देखना।

मेरी हर एक सांस में तू है,

हर ख्वाब में तेरा रंग,

मेरी हर एक बात में तू है,

जैसे कोई अधूरी तरंग।

कभी लगता है तू पास ही है,

बस एक कदम की दूरी पर,

फिर ये हकीकत हँस पड़ती है,

और मैं रह जाता हूँ उसी मोड़ पर

इंतज़ार अब आदत बन गया,

इबादत अब सुकून बन गई,

और तू...

तू मेरी हर बात की वजह बन गई।

मैंने तेरे नाम की चादर ओढ़ी,

हर दर्द को उसमें छुपा लिया,

तेरी यादों के दीप जलाकर,

हर अंधेरे को सजा लिया।

तेरे बिना जो जी रहा हूँ,

वो जीना भी क्या जीना है,

जैसे सूखे पेड़ की शाखों पर,

कोई पत्ता भी ना जीना है।

पर फिर भी उम्मीद बाकी है,

जैसे सूखे में बारिश का ख्वाब,

शायद किसी दिन तू लौटे,

और भर दे मेरा हर जवाब।

मैंने तेरे रास्तों को देखा,

हर रोज़ उसी मोड़ पर खड़ा,

जहाँ आखिरी बार तू दिखी थी,

और वक्त वहीं थमा पड़ा।

इबादत में अब कोई मांग नहीं,

बस तेरा होना काफी है,

तू मिल जाए तो जिंदगी,

वरना हर सांस अधूरी है।

तेरी खामोशी भी समझी है मैंने,

तेरे हर दर्द को जाना है,

तू भले ही दूर चला गया,

पर तुझे दिल से पहचाना है।

इंतज़ार में भी एक सुकून है,

तेरी यादों का सहारा है,

जैसे सूनी राहों में भी,

तेरा नाम ही उजियारा है

मैंने खुद को समझाया है,

कि तू लौटकर आएगा,

हर अधूरी कहानी को,

एक दिन पूरा कर जाएगा।

तेरे बिना जो लम्हे गुज़रे,

वो जैसे सदियों के बराबर थे,

हर एक पल में तेरा नाम,

और आँखों में बस आँसू भर थे।

पर अब भी दिल कहता है,

ये दूरी बस एक इम्तिहान है,

इबादत अगर सच्ची हो तो,

मिलना भी आसान है

तू अगर मेरी किस्मत में है,

तो वक्त भी झुक जाएगा,

हर रास्ता मुड़कर एक दिन,

तेरे पास ही ले जाएगा।

मैंने हर दर्द को अपनाया है,

तेरी याद में मुस्कुराकर,

जैसे कोई दीप जलता हो,

आंधियों से लड़कर भी जगमगाकर।

तेरी यादों का कारवां,

अब मेरी जिंदगी बन गया,

हर एक मोड़ पर तेरा नाम,

मेरा रास्ता बन गया।

इंतज़ार अब शिकायत नहीं,

बल्कि एक खूबसूरत एहसास है,

क्योंकि इसमें भी तू है,

और यही मेरी सबसे बड़ी आस है।

इबादत में अब शब्द नहीं,

बस खामोशी बोलती है,

हर धड़कन में तेरी कहानी,

धीरे-धीरे खोलती है।

मैंने तुझमें खुदा देखा है,

और खुदा में तेरा अक्स,

इसलिए हर दुआ में तू है,

और हर सज़दे में तेरा ही हक़।

कभी अगर तू लौटे,

तो ये मत पूछना मैं कैसा हूँ,

बस मेरी आँखों में देख लेना,

मैं आज भी वैसा हूँ।

वही इंतज़ार, वही इबादत,

वही तेरा नाम लिए,

वही अधूरी सी मुस्कान,

वही अधूरे अरमान लिए।

तू मेरी कहानी का हिस्सा नहीं,

तू मेरी पूरी कहानी है,

तेरे बिना जो लिखा जाए,

वो बस एक वीरानी है।

मैंने हर ख्वाब में तुझे देखा,

हर ख्याल में तुझे पाया,

और हर बार खुद से पूछा,

क्यों मैंने तुझको इतना चाहा?

पर जवाब हमेशा एक ही आया

कि तू मेरी इबादत है,

और इबादत में सवाल नहीं होते,

बस समर्पण की आदत है।

इंतज़ार अब भी जारी है,

पर दिल अब बेचैन नहीं,

क्योंकि यकीन है मुझे,

तू कहीं दूर नहीं।

तू भी शायद महसूस करता होगा,

मेरी इन खामोश पुकारों को,

तू भी शायद गिनता होगा,

मेरे इंतज़ार के सितारों को

और जब एक दिन हम मिलेंगे,

तो कोई शिकायत नहीं होगी,

बस एक लंबी खामोशी होगी,

जिसमें सारी बातें कही होंगी।


इंतज़ार, इबादत और तू

तब मैं तुझे देखूंगा यूँ,

जैसे पहली बार देखा हो,

और तू मुस्कुराएगी ऐसे,

जैसे कभी बिछड़ा ही ना हो।

इंतज़ार का हर पल तब,

एक कहानी बन जाएगा,

और इबादत का हर सजदा,

तेरे कदमों में झुक जाएगा।

तू आएगा... ये यकीन है,

मेरी हर सांस की तरह सच्चा,

और जब तू आएगा,

तो खत्म होगा हर एक सन्नाटा।

तब ये दिल कहेगा

कि इंतज़ार बेकार नहीं था,

इबादत अधूरी नहीं थी,

और तू…

तू कभी दूर था ही नहीं।

तू तो हमेशा यहीं था,

मेरे हर एहसास में,

हर दर्द में, हर खुशी में,

मेरे हर विश्वास में।

और मैं मुस्कुराकर कहूँगा

कि अब कुछ बाकी नहीं,

इंतज़ार पूरा हो गया,

इबादत मुकम्मल हो गई,

क्योंकि अब

**तू मेरे साथ है।**

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