खत जो कभी भेजे ही नहीं

 **शीर्षक: खत जो कभी भेजे ही नहीं**


खत जो कभी भेजे ही नहीं

कुछ खत लिखे थे मैंने,

तेरे नाम के,

पर भेजे कभी नहीं…

वो आज भी मेरे दराज़ में रखे हैं,

जैसे किसी अधूरी कहानी के

खामोश पन्ने।


उन खतों में स्याही नहीं,

मेरी धड़कनें बसी हैं,

हर शब्द में छुपी हैं वो बातें,

जो मैंने तुझसे कभी कही ही नहीं।


पहला खत उस दिन लिखा था,

जब तू पहली बार हँसी थी,

तेरी मुस्कान ने जैसे

मेरे भीतर कोई दीप जला दिया था।


मैंने लिखा

तुम्हारी हँसी में कुछ तो बात है,

जो मेरे हर अंधेरे को उजाला कर देती है…”

पर फिर डर गया…

कि कहीं ये उजाला

तुझे डरा न दे।


और वो खत…

मेरे दिल की तरह

मोड़कर रख दिया गया।


दूसरा खत तब लिखा,

जब तू दूर जाने लगी थी,

बातों के बीच खामोशी बढ़ने लगी थी,

और मैं हर रोज़

थोड़ा-थोड़ा टूटने लगा था।


उस खत में मैंने लिखा

रुक जाओ ना…

थोड़ा और ठहर जाओ,

तुम्हारे बिना ये दुनिया

कुछ ज्यादा ही खाली लगती है…”

पर फिर सोचा

किस हक़ से रोकूं तुझे?


और वो खत भी

आँखों के आँसुओं में भीगकर

दराज़ में सो गया।


कुछ खत ऐसे भी थे,

जिनमें मैंने तुझसे शिकायत की,

कि क्यों नहीं समझती तू

मेरी खामोशियों को?


क्यों हर बार

मैं ही तुझे महसूस करता हूँ,

और तू…

बस एक नाम बनकर रह जाती है?


पर फिर खुद ही उन शब्दों को

मिटा दिया मैंने,

क्योंकि मोहब्बत में

शिकायतें अच्छी नहीं लगतीं।


एक खत ऐसा भी था,

जिसमें मैंने तुझे

पूरी तरह पा लिया था

ख्वाबों में।

उस खत में लिखा

आज तुम मेरे साथ थीं,

मेरे बहुत करीब…

इतनी करीब कि

दूरी का हर मतलब खत्म हो गया था।”


वो खत सबसे खूबसूरत था,

पर सबसे झूठा भी…

क्योंकि हकीकत में

तू कभी इतनी करीब आई ही नहीं।


मैंने एक खत और लिखा,

जिसमें सिर्फ एक लाइन थी

मैं तुमसे प्यार करता हूँ।”


बस इतना ही

ना कोई अलंकार,

ना कोई सजावट,

सिर्फ एक सच्चाई।


पर वो खत भेजने की हिम्मत

कभी जुटा नहीं पाया,

क्योंकि डर था

अगर तूने “नहीं” कह दिया तो?

तो क्या होगा उन सपनों का,

जो मैंने तेरे नाम से जोड़े हैं?


इसलिए वो खत भी

मेरे दिल की तरह

अनकहा रह गया।


समय गुजरता गया,

और खत बढ़ते गए,

हर नए दिन के साथ

एक नई बात जुड़ती गई।


कभी तेरी यादों में,

कभी तेरे ख्यालों में,

मैंने खुद को हर बार

उन खतों में उतार दिया।


एक खत में मैंने लिखा

तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ…”

और अगले ही पल

उस लाइन को काट दिया,

क्योंकि मैं तुझे

अपनी कमजोरी नहीं बनाना चाहता था।


खत जो कभी भेजे ही नहीं

फिर एक दिन

तू सच में चली गई…

बिना कुछ कहे,

बिना कोई जवाब दिए।


उस दिन मैंने

सबसे लंबा खत लिखा।


हर वो बात लिखी,

जो सालों से दिल में थी,

हर वो एहसास लिखा,

जो मैंने तुझसे छुपाया था।


मैंने लिखा

तुम चली गई हो,

पर मेरा एक हिस्सा

अब भी तुम्हारे पास है।


अगर कभी लौटो,

तो उसे साथ ले आना…”

उस खत के हर शब्द में

टूटन थी,

हर लाइन में

एक अधूरापन था।


पर वो खत भी…

कभी भेजा नहीं गया।


क्योंकि अब

भेजने का कोई मतलब नहीं था।


अब मेरे पास

सिर्फ ये खत हैं

जो कभी भेजे ही नहीं गए,

और एक दिल है

जो कभी समझा ही नहीं गया।


कभी-कभी मैं उन खतों को खोलता हूँ,

हर शब्द को फिर से पढ़ता हूँ,

और हर बार

तुझे फिर से जीता हूँ।


तेरी हँसी,

तेरी बातें,

तेरी खामोशियाँ

सब कुछ उन कागजों में

जिंदा है आज भी।


ये खत मेरे लिए

सिर्फ कागज नहीं हैं,

ये मेरी मोहब्बत के

सबूत हैं,

जो मैंने कभी किसी को दिखाए नहीं।


अब सोचता हूँ

अगर ये खत भेज दिए होते,

तो क्या तू समझ पाती मुझे?

क्या तू रुक जाती?


या फिर

और दूर चली जाती?


शायद ये सवाल

हमेशा सवाल ही रहेंगे…

पर एक सुकून है

कि मैंने जो महसूस किया,

उसे कभी झुठलाया नहीं।


मैंने उसे लिखा,

संभाला,

और अपने पास रखा

जैसे कोई अमानत।

अब ये खत

मेरी आदत बन गए हैं,

हर रात एक नया खत लिखता हूँ,

और हर सुबह

उसे भेजे बिना ही छोड़ देता हूँ।


शायद कुछ बातें

कहने के लिए नहीं होतीं,

बस महसूस करने के लिए होती हैं।


और मेरी मोहब्बत भी

कुछ ऐसी ही है

जो कभी कही नहीं गई,

बस लिखी गई…

उन खतों में

जो कभी भेजे ही नहीं गए।


कभी अगर तू लौटे,

और पूछे

क्या तुमने मुझसे कभी प्यार किया था?”

तो मैं कुछ नहीं कहूँगा,

बस वो दराज़ खोल दूँगा…


जहाँ पड़े हैं

वो सारे खत

जो कभी भेजे ही नहीं गए,

पर जिनमें

मैंने हर बार

तुझे पूरी शिद्दत से चाहा है।


तब शायद तू समझ पाए

कि खामोशी भी

कभी-कभी

सबसे गहरी आवाज़ होती है।


और अनकहे लफ्ज़…

सबसे सच्ची मोहब्बत।


ये खत भले ही

तेरे पास कभी नहीं पहुँचे,

पर तेरे नाम से लिखे गए हर शब्द ने

मुझे जीना सिखाया है।


मैंने इन खतों में

अपनी रूह रख दी है,

और शायद इसी वजह से

मैं आज भी जिंदा हूँ।


क्योंकि कुछ मोहब्बतें

मुकम्मल नहीं होतीं,

पर फिर भी

सबसे खूबसूरत होती हैं।


खत जो कभी भेजे ही नहीं

और मेरी मोहब्बत…

उन खतों की तरह है

जो कभी भेजे ही नहीं गए,

पर जिनमें

पूरा दिल लिखा हुआ है। ❤️

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