तेरे बिना
तेरे बिना एक प्रेम कबिता। इन्हां एक आशिक़ दीवाना अपना प्रेमिका को बताना चाहाता है उसका हालात की बारे में। जीबन कितिना बनजाता उदास उसकी बिना। व सह नहीं पाता प्रेमिका से जो रहता सामयिक दूरियां। भावप्रबन बनके बताना चाहता अपना उसकी प्रति रहनेवाले सम्बेदना। प्रेम की वही सारे मधुर मिलन का बातें भूल नहीं पाता व।
ऐसे कुछ दुःखद भावना को लेकर व हो उठता प्रतिवादी। अपना प्रतिक्रियात्मक ढंग से दोषारोप करता जाता कभी परिबेश को तो फिर कभी अपना नासमझदारी अक्षमता को।
ऐसा एक हालात से अपना प्रेम को बरकरार रखनेको कोशिश करतेहुए तरीका यानी उपाय पांचने की साथ साथ सलाह लानेको करता प्रयास मगर हरकोइ से नहीं। केवल उसी से जिसे व करता है प्यार कहलाती प्रेमिका।
प्रेमिका के साथ व करनेको चाहाता दिलकी बात कियूं की उसकी साथ है व अंतरंगता। उसकी सलाह को सबसे बेहतर मानता। प्रेमिका को बार बार अपना कोमल तथा सुखद बचन पुष्पकि सुगंध में शांतुस्ट करनेको कोसिस करता। उसी से भावपूर्ण भागीदारी का अपेक्षया रखतेहुए गाता एक प्रेम आधारित भावगात्मक प्रेम कबिता जो है तेरे बिना:
तेरे बिना
ए हसीना .....!
खुले जुल्फें वाली
जाने जाना
कहिंपे भी अब
दिल लगता नहीं
तेरे बिना।
देखो अब भी
मौसम कितिना है
सुहाना
प्रेम की पंछी
उड़ता जाता निल
आसमां।
राम जाने
कियूं आया है ?
ऐसा जमाना
फूल-भ्रमर का
प्रेम संपर्क में
दरार आना।
कियूं रहेगा ?
ऐसा एक हालात
बतला देना
बजह क्या है ?
दिलवालों को
दोषी कहना।
मुझ को
तुम फिर कहदो
मेरे मेहमान
ऐसे मुझे नहीं
जीना है
तेरे बिना।
ये बिलकुल सच है दोस्तों,सचमुच है इसमें बास्तविकता। जीबन में प्रेम का रहता एक स्वतंत्र और सबसे प्रभावशाली भूमिका। प्रेम में जब रहता आपस मैं दृढ़ता जीबन बनजाता एकदम आसान , आजाता जीबन में निखार। परिबेश बन जाता सुहाना,जीबन को लेजाता दिब्यता की ओर। यही तो है बास्तब में जीबन का असली मकसद और आभिमुक्ष्य। ये एक भावनात्मक अबधारणा मगर असली जीबन में है उतना ही आबश्यकता।
ऐसे कुछ दुःखद भावना को लेकर व हो उठता प्रतिवादी। अपना प्रतिक्रियात्मक ढंग से दोषारोप करता जाता कभी परिबेश को तो फिर कभी अपना नासमझदारी अक्षमता को।
ऐसा एक हालात से अपना प्रेम को बरकरार रखनेको कोशिश करतेहुए तरीका यानी उपाय पांचने की साथ साथ सलाह लानेको करता प्रयास मगर हरकोइ से नहीं। केवल उसी से जिसे व करता है प्यार कहलाती प्रेमिका।
प्रेमिका के साथ व करनेको चाहाता दिलकी बात कियूं की उसकी साथ है व अंतरंगता। उसकी सलाह को सबसे बेहतर मानता। प्रेमिका को बार बार अपना कोमल तथा सुखद बचन पुष्पकि सुगंध में शांतुस्ट करनेको कोसिस करता। उसी से भावपूर्ण भागीदारी का अपेक्षया रखतेहुए गाता एक प्रेम आधारित भावगात्मक प्रेम कबिता जो है तेरे बिना:
तेरे बिना
ए हसीना .....!
खुले जुल्फें वाली
जाने जाना
कहिंपे भी अब
दिल लगता नहीं
तेरे बिना।
देखो अब भी
मौसम कितिना है
सुहाना
प्रेम की पंछी
उड़ता जाता निल
आसमां।
राम जाने
कियूं आया है ?
ऐसा जमाना
फूल-भ्रमर का
प्रेम संपर्क में
दरार आना।
कियूं रहेगा ?
ऐसा एक हालात
बतला देना
बजह क्या है ?
दिलवालों को
दोषी कहना।
मुझ को
तुम फिर कहदो
मेरे मेहमान
ऐसे मुझे नहीं
जीना है
तेरे बिना।
ये बिलकुल सच है दोस्तों,सचमुच है इसमें बास्तविकता। जीबन में प्रेम का रहता एक स्वतंत्र और सबसे प्रभावशाली भूमिका। प्रेम में जब रहता आपस मैं दृढ़ता जीबन बनजाता एकदम आसान , आजाता जीबन में निखार। परिबेश बन जाता सुहाना,जीबन को लेजाता दिब्यता की ओर। यही तो है बास्तब में जीबन का असली मकसद और आभिमुक्ष्य। ये एक भावनात्मक अबधारणा मगर असली जीबन में है उतना ही आबश्यकता।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें