चंदा व सुंदरता का नाम
सुंदरता एक अबधारणा,जिस में रहता व नैसर्गिक गुण जो हर कोई को शांति प्रदान करनेका रखता अभिनब ओकात ,सक्ष्यमता। बस जरूरत रहता इसमें स्थित सौन्दर्यबोधता को ग्रहण करनेका सक्ष्यमता जो है सकारात्मक नजरियां। जिसके पास रहता जितिना बड़ा नजरियां व उतना ही जैदा उपभोग करपाता सौंदर्यता। उपलब्धि करसकता अपना मानसिक चेतन मन में तथा चिर आल्हादित हृद कमल में।
वैसे देखाजाए तो भगबान की हर कृति में भरपूर रहता ही है सौंदर्यता। अनेक बार हमलोग उसे हर समय में नहीं करसकते उपलब्धि। कारण हमारे में उसी वक्त रहजाता कुछ खामियां। समझ लेते किसी चीज को बेकार। जहां वही चीज से कोई एक दुसुरा ब्यक्ति उपलब्धि करपाता ढ़ेर सारे सौंदर्यता कियूं की वही ब्यक्ति का चित्त बृत्ति में रहता एक सोच सकारात्मकता उसे उपभोग करनेका उत्सुकता।
मर जगत में प्रकृति और जीबन में है व अंतरंगता। ये आज से नहीं जबसे हुआ है धरती में जिबसत्ता का जन्म। तबसे चलता आया है ये प्रकृति प्रेम का शिलशिला। एक जिब होने के नाते मानब भी है व प्रकृति प्रेम का भावना। मानब भी बनजाता प्रकृति प्रेमी और प्रकृति प्रति उसका रहनेवाला प्रेम को जताते हुए ब्यक्त करने को अपनाता भाषा शैली का एक अनुपम अपूर्ब कौशल जो उसका झर कलम से झर झर करके निगलजाता अक्षर रूपी ढ़ेर सारे काब्य और कबिता। जरूर इसमें रहता कई सारे बिभेदता मगर मकसद एक प्रकृति प्रति अपना स्थित प्रेम को ब्याक्षया करना। इन्हां ऐसा एक प्रकृति -बादी कबिता चंदा व सुंदरता का नाम।
चंदा व सुंदरता का नाम
बसन्त की इस ब्रम्ह मुहूर्त में
जब सयन उपेक्षि चौपाई से उठें
प्रभात भ्रमण की उत्सुकता में
घरसे बाहर निकलने की प्रयास में
सुन्दरसा एक तारा दिखाई देता
सुविस्तृत निल आसमां में।
वाहां रूपेली आकाश में एक परी
सहस्र आलोकमाला का बिभाबरी
देखने से लगता खुद एक चितरसारी
देखना मना है निसिद्धादेस जारी।
अपना पाण्डुरिमा इज्वल रंग में
रंगादेता सारे मुल्क स्वजल रूपरंग में
हंसता हंसाता फूल खिलाता रेगीस्थान में
फिर सम्बेदन जताता विगलित हृद में।
किसीके पर क्या प्रभावमें कैसे कहते
जिसे पूछें कैसा है ? सब अच्छा है कहते
मेरे नजर में व एक प्रेमी ही दिखते
कितिना नाम पता नहीं व चंदा कहलाते।

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