संघर्ष की स्वीकार

संघर्ष की स्वीकार
युद्ध,लड़ाई,संघर्ष,बिबाद आदि सारे एकार्थ बोधक सब्द है दोस्तों। जिबन इसके शिबाय और कुछ है ही नहीं । इसीलिए ज्यानी गुणी लोग कहते हैं कि जिबन का दुसुरा नाम संघर्ष है ही। जीबन और संघर्ष का रिश्ता आजकी नहीं है बहुत पुरानी और चिरंतनी। ये आगे भी चलता ही जाएगा कभी भी थमेगा नहीं जो एक बहत बड़ा अच्छा बात।

जिंदगी में संघर्ष की सुफल

जिबन में संघर्ष हेतु जिंदगी में मजा बरकरार रहता। ये न होता तो जीबन बनजाता बिसाद ग्रस्त,दुःखी, मर्माहत। एक संघर्ष ही हमे करता चल चंचल। भरता अशरन्ति आशा मनमें और लेजाता उस तरफ जहां जिबन का होता अच्छाई। हर प्रतिकूलता के बिरुद्ध लड़नेको सिखाता कौशल संघर्ष को करनेको प्रतिहत। अपनी आप संघर्ष बनता एक महान ज्यानी जिबन को बनाता ससक्त कौशली। इसी के कारण संघर्ष बनता मानब का उपकारी तो जिबन में संघर्ष को स्वीकारना ही होगी।

संघर्ष की स्वीकार


संघर्ष की स्वीकार


जिबन आज
चल चंचल हीन
कारण ये है नहीं कि
बन गया है शक्ति हीन
मगर व सारे स्थिति की बंधन
बांध लिया है करता मैं क्रंदन
आशा आकांख्या में भरा जिबन
आगे कुछ होगा बोलता अथय मन !!

बात आज का है ही नहीं
कबसे कोई अनादि कालसे
प्रतिकूल मुखी परिबेश में भी
जूझता ही आया है  यूं मानब
प्रतिहत कर चुकाहै कितीनोंको
सांठ गांठ भी कराचुकि है किसीसे
जिबन के प्रति स्थित जीनेका मोह
जिंदगी को जीना अक्सर सिखादेता
बता देता सही गलत जो सारे रास्ते !!

आज भी ऐसी ही एक स्थिति चल रहा है
बिस्वकी हर एक मानब जूझ रहा है
जिबन मरणकी संघर्ष चलता है निरब में
हर कोई अपनिको सजा रहा है सैनिक
तैयार रहता स्तिथि पे शारीरिक मानशिक
जूझने को ऐसी एक युद्ध जहां सस्त्र की कोई बिलकुल जरूरत है ही नहीं !

केवल कौशल है जिसकी बल पर
अपनी अंदरकी कुछ की ताकतों से
बनालेता कांगाल लेजाता सब कुच
लेकर खड़ा करदेता ऐसी एक स्थिति पे
जहां हमारे में नहीं रहता मान बिकता
चलाजाता हमसे कहीं दूर  सत मार्ग
लौटने की कोई प्रयास भी नहीं करता
फिरसे सही पटरी पे आने को वहीं से
धैर्य अनुशासन से हार करलेता स्वीकार
बनके किम कर्तब्य विमूढ़ता बन के
होजाता हार भर जाता विफलता से
एक अछि सीख मिलता अब कोरोना से
बताता लगाव बनालो अपना अपनों से
रिस्तोंको मजबूत करलो बेहतर पहले से
दिखादो अपना धैर्य और सहन शीलता 
जगादो हर मानब में व अशरन्ति शक्ति
कहनेको मैं हारनेवाला नहीं हूं किसी से!!





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