व कुछ पल

व कुछ पल

बड़ा बिचित्र ये संसार और उतना ही बिछत्रता इसकी रचयिता में दोस्तों। सोच में नहीं आता एक ही जीबन में भिन्न भिन्न समय में कितिना नहीं आता बिभिनता। कभी सुख तो कभी दुःख आजाता ये पूरा चलता रहता एक चक्र। एक कभी किसी के जीबन में हमेसा के लिए नहीं रहता। बदलते जाता बदलते जाता। बास्तविक क्षणभंगुर जीबन में ये अक्सर सभी के जीबन में आता। सभीने इस पर होते हैं अबगत। सभीको है पता।

सुख तो सभीको लगता अच्छा मगर दुःख किसीको भी अच्छा नहीं लगता। सभीको कष्ट देता। कष्ट में भी राहत कुछ ऐसे दुःख जिसे सेहना आसान होता। जिसको सेहना सभीके बसकी बात नहीं होता और सभीके जीबन में भी ऐसा अबस्था नहीं आता। प्रकार में रहता उन में भिनता। सभी के कारण और प्रतिक्रिया में भी राहत बिभेदता। इनमें से सबसे दुखदाई होता ऐसे कुच्छ मुहूर्त या पल जिसे हम कहते अपेक्षया। हम किसीकी चाहते हैं सान्निध्य और मुलाकात हो नहीं पाता। करना पड़ता लंबे समय तक अपेक्षया। व कुछ पल बड़ा दुःखदाई होता बहत पीड़ा देता। कभी भी समय काटता नहीं समय लंबी होता जाता। एक घंटा एक शाल की बराबर लगता। बढ़ाता जाता मनमें अबांछित उत्कंठा और धड़कन को बढ़ाता जाता। शारीरिक तथा मानसिक पीड़ा प्रदान करने लगता। ब्यक्ति को हालात से लाचार बनादेता। व कीं कर्तब्य विमूढ़ बनकर केवल निहारता जाता निहारता जाता बनके अबाक।

प्रेम संबंध में भी आजाता कुछ ऐसे अबस्था जो सबसे दुःखदाई होता। जब बाकी अबस्था में कुछ और कि बात होता इन्हां होता प्रेम की प्रसंग जिसमे बिषय रहता तन,मन और मिलन का। किसी एक का प्रतिक्षया दूसरे को अक्सर पीड़ा ही देता इन्हां तक कि दिल में जलन आजाता। तन मन में लग जाता आग। दुःख असह्य होजाता और निकल आता प्रेमी की मुहूं से एक दुःख पूर्ण प्रेम कबिता व कुछ पल है जिसका नाम।

निशि शेषे बालूत प्रहरे
निद्रा भाजी चेतना में आते
याद होता जो बीते हुए बातें
भावना राज्यमें मैं डूबते जाते।।

अशांत समुंदर जैसे हृद
करता है शब्द बुद बुद
मन बेहाल में बेचैन खुद
पसीना निकलता चल आता
वाहां जानेको इच्छा होता
जहां मृदु मलय बहता सुद्ध।।

फिर मन चल आता वाहां
काल हम दोनों कुछ पल
बातें करके बिताएथे जहां
आज फिर वही सोच आया
प्रेमकी बाताबरण में मैं बाया
प्रबल प्रकम्पित इच्छा होता
घुसनेको फूल राज्यमें जहां
मन और प्रेम की मिलन होजाता।।

तुम्हे निहारते कुछ पल बिता
आप भी त बेचैन हो कियूं ये होता
बार बार बिलंब हो ही जाता 
व कुछ पल मधुबन में आग लगाता
तन मन में दुःख खिलाके जलन देता।।

व कुछ पल
व कुछ पल

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