मेरी जान
प्रेम जिबिन की एक प्रमुख अंग है दोस्तों। प्रेम बिना जिबिन बन जाता एक रेगिस्थान। जहां जिबिन में प्रेम रहता कोई भी जिबिन में भर देता सुंदरता, लेआता असरन्ति आशा। बढ़ादेता जिबनकी आकांख्या को ,भर देता नई उन्मादना। जिबिन को बनादेता सरस, सुंदर। अंतर में जगाता एक बिजिगिसा।
आंखों में भर देता लेआता व इज्वलता,सजादेता आंखों में असरन्ति सपनें। मन में लेआता आत्मबिस्वाश कुछ करने को। कभी ये प्रेम बनजाता किसीके लिए चंदन बन से निकला हुआ मृदु सुबासित सीतल समीरण जो किसी दुःखी जिबिन को प्रदान करता सीतलता लाता शांतुस्टी। कभी फिर बन जाता किसी और के लिए सांत्वना। कभी भी बनता दया, क्ष्यमा और अनुदान।
अबश्य,प्रेम बदलता अपना रूप सभी के लिए हमेसा एक जैसी नहीं होता। रहता भिन्नता कारण सभीके दृश्टिकोण एक जैसे नहीं होता। ये एक भाव से निकलता कभी एक कबिता भी बनता लेके नाम जैसे मेरी जान।
मेरी जान मेरी जान
जबसे हुआहै पहचान
भूख उड़ा फिर चैन गई रे
लगता नहीं खान पान ।।
सूरज उगता दिन भी ढलता
आ भी जाता कभी साम
समय मेरा गुजरता काहाँ रे
जपता रहता बस तेरी नाम ।।
मन में आता कितने सपने
आता रहता मन ही मन
मन बावला तेहरते जाता
ओष में ऐसे सुबह शाम ।।
मनको मिलता अपना खाना
दिल बेचारा रहता मौन
गुमसुम हमेसा पीडामें रहता
है कोई इसकी समाधान ?
कब आएगा व घड़ी फिर
होता रहेगा व मिलन
दिलको मिलेगा अपनी हिस्सा
मिट जाएगा सारे जलन ।।
आंखों में भर देता लेआता व इज्वलता,सजादेता आंखों में असरन्ति सपनें। मन में लेआता आत्मबिस्वाश कुछ करने को। कभी ये प्रेम बनजाता किसीके लिए चंदन बन से निकला हुआ मृदु सुबासित सीतल समीरण जो किसी दुःखी जिबिन को प्रदान करता सीतलता लाता शांतुस्टी। कभी फिर बन जाता किसी और के लिए सांत्वना। कभी भी बनता दया, क्ष्यमा और अनुदान।
अबश्य,प्रेम बदलता अपना रूप सभी के लिए हमेसा एक जैसी नहीं होता। रहता भिन्नता कारण सभीके दृश्टिकोण एक जैसे नहीं होता। ये एक भाव से निकलता कभी एक कबिता भी बनता लेके नाम जैसे मेरी जान।
मेरी जान
मेरी जान मेरी जान
जबसे हुआहै पहचान
भूख उड़ा फिर चैन गई रे
लगता नहीं खान पान ।।
सूरज उगता दिन भी ढलता
आ भी जाता कभी साम
समय मेरा गुजरता काहाँ रे
जपता रहता बस तेरी नाम ।।
मन में आता कितने सपने
आता रहता मन ही मन
मन बावला तेहरते जाता
ओष में ऐसे सुबह शाम ।।
मनको मिलता अपना खाना
दिल बेचारा रहता मौन
गुमसुम हमेसा पीडामें रहता
है कोई इसकी समाधान ?
कब आएगा व घड़ी फिर
होता रहेगा व मिलन
दिलको मिलेगा अपनी हिस्सा
मिट जाएगा सारे जलन ।।

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