ओ प्रिया मेरे .....


प्रेम एक पयोनिधि

जब दो दिल बंधे जाते एक के बिना दुसुरा असम्पूर्ण ऐसे मेहेसुस करते I एकमें छाजाता अकेलापन I बार बार धुन्ड़ता अपने साथिको कारण उनमें आत्मा एक और पिंड भिन्नकी हालात होती I हर समय और पारीस्थिति में एकीभूत होकर रहनेकी रहती मकसत I यही हे तो प्रेमकी रीती I प्रेममें तर्लिन होकर अपनि आपको भूलजाना और प्रेम में ही प्रेमको ढूंडते ही रहना तो प्रेमकी नियत है I स्वार्थ रहित उत्सर्गिकृत कर्म प्यारके लिए करते जाना तो ही सास्वत प्रेमकी लक्ष्यन I प्रेम ही पूजा प्रेम पुजारन प्रेम ही प्रेम का भगबान I न कोई सामान न कोई समान जगमें उतना मुलबान I प्रेम हे बंदन I प्रेम भी चन्दन प्रेम तो हे बलिदान I प्रेम बिना भी जीबन जीना अबास्ताब अकारण I

प्रेममें प्रेमी कभी प्रेमिका को भी पुकारता


ऐसे अकेले समयमें प्रितिकी इच्छा को मनमें रखते हुए प्रेमी आपनी प्रिया को भी पुकारता I जैसे बारिश की पहली अशर जब धरतीमें पड़ता चकोर की दिलमें लाता हिल्लोल,जगाता उनमें मिलनकी अभिप्राय ओ अपनी प्यारी तान में करता बोबाल I बुलाता चकोरीको आपनी पास I प्रेममें होनेको एकाकार , भूल जानेको आपनी अस्थित्व मुकार I सम्बिलित होके बननेको एक से अनेक I बनानेको प्रेमकी एक मधुर उपबन जहां सबकुछ होगा मधुरता रंगबेरंगी सुन्दर पुष्प ,भ्रमरकी उन्मादना और कोयल की तान I मनको करता जाता बिभोर और प्रेमी पागल गाताजाता ऐसे एक गीत जिसका नाम हे ओ प्रिया मेरे .....


ओ प्रिया मेरे .....

ओ प्रिया मेरे .....




ओ प्रिया मेरे ..... 

सागर किनारे
धीर समीरे
दिल मेरा धुन्ड़ता जाता
तुझको साथिरे
प्रिया मेरे रे ......!!

मन में भी ख्वाफ़ उठता
काफी साथिरे
क्या कुछ मैं भाबते जाता
मनमें मेरे रे
ओ प्यारे मेरे .....!!

गहेरी सागरमें देखता
आँखें मैं तेरे
खुले जुल्फें भी उड़ता
हिलते लेहेरे
ओ जान मेरे .....!

दिल भी उदास भरा
तुझको पुकारे
छाति पे आग उठके
जला जातारे
ओ प्रियतमारे.....!!

अशांत समुन्दर जैसे
हाल बनेरे
प्रेमकी धारा बनके
आजा प्रियारे ,ओ मेरे प्यारे .....!!

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