मैं हूं नाराज


मैं हूं नाराज

 जीबन की राहों में कई परिस्थितियाँ का सामना करना पड़ता है दोस्तों I ऐसे जीबन हमेसा एक जैसे सलख गति में नहीं चलता I कभी सलख सुन्दर गतिमे चलता तो कभी आजाता घोर घनघट्टा और जीबन को देदेता कुछ अबांछित मोड जिसे जिबनको स्वीकारना पड़ता I आपनी आपको परिस्थितिके साथ करना पड़ता समयोजन I देना को पड़ता जीबन को गति किउं की जीबन ऐसे हमेसा स्थिर होकर नहीं चलसक्ति I आगे बढ़कर कुछ बहेतर करनेका होसला की है जुरत करनेको साकार जीबन की परिभाषा को I मेरा मन में भी आजाता नाराजगी I


कभी ऐसे कुछ पारिस्थि में जब नाराजगी आता


कभी कुछ ऐसे परिस्थिति में जब अजाता प्रतिकूलता और मनमें लाता नाराजगी I संतापित होकर मन आत्मा खोजता कुछ अनुकूलता को इधर उधर पानेको चाहता शान्ति I कभी काबर होता फिर असफल तो इसी परिस्थिति में कभी अपनीको तो कभी फिर दूसरों को देता दोष I जबकि ये स्विकारनेको बहता नाराजिकी की मैं हिं हूं मेरे ही समस्याका सबकुछ अदि अंत और हलका सबकुछ I मेरे में हिं समाधान का उत्स I करना होगा उसको अनुसंधान I जीबन को बनाना पडेगा बेहेतर मुल्यबान I सार्थक I ख़राब परिस्थितिको बनाना पडेगा बहेतर ढून्ड़ना पडेगा समस्याओंके समाधान I मनको प्रफुल्लित जो है करना I

मैं हूं नाराज
मैं हूं नाराज





मैं हूं नाराज

काल भी वेसाही था
आज भी हूं  मैं बिंदास
चलना ही जीबन है बस
चलतेही रहना कोई बोल्ररहाथा
जो बिलकुल सही और एकदम खाश !!

सपनें कितनें नाथे काल
कम कान्हां हुआ भी आज
सिर्फ कुछ तरीके बदलगये है
बदलाभी कामकाज केसाहे राज !!

अमूमन वेसे ही बहता आज
वही पुर्बैया मृदु धीर समीरण
ठंडक पड़ता तो सीतलहै तन
मगर केवल ग्लानी अंतर मन !!

पता नहीं चलता क्या है कारण  
क्या कहीं कम क्या होगेया धन
याफिर कहींपे चलागेया सम्मान
जो कभी था  मेरा अभिमान !!

देखो कितिना दुखीहूं मैं फिर आज
मन लगता नहीं करनेको कामकाज
क्या करूं ये कैसा मुझको एक सजा
हालात एसाहै की मुझपर मैंहूं नाराज !!

काल कितिना मैं नाथा भला बलशाली
आज भी काहां ऐसे  उतना निर्बल हूं
मगर मौक़ा तो काफी मैं गबाचुका हूं 
अब सबरनेकाहै अपनीको किउं गबाउन !!



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