मन की जित .....


मन की जित .....

समयकी कराल कालचक्र में अमूमन आता हे ऐसे कई परिस्थितियाँ दोस्तों जहांसे मुक्त होना नहीं होता आसान सा काम I सरल जिबन की सलाख पथ पर बिछादेता कांटे जिसपर चलना होता काफी दुर्बहमान I हमेसा जिन्दगी देतेजाता चुनौती I होताजाता जीबन चुनौती भरा मगर आशाका प्रकाश दिप्तिबंत इज्वल नक्ष्यत्र सदृश सफलताका कहर आता वहीँ से जो मेरे कठिनाइन की पिछेहोता I यही हे बास्तबिकता I इसकी पीछे ही होता सफलता I सारे स्वप्न्की इसपर रहता निहित I जब समस्याका होजाता समाधान मिलती सफलता इनामकी तोरपर I

आँख बंद करके हसीन सपने देखना सभीको अछिलगती दोस्त I सपनेको बास्तबिक बनानेमें रहता कठिनाई I जहां जरुरत पड़ता स्वतंत्र कौशल तथा ज्यानकी जो केवल कठिन अध्यबसायकी बल पर केवल होपाता सम्भब I जिसे हम में से कई डरके भाग जाते तो कई असमर्थता प्रकाश करके हार मानलेते और सफलता पानेसे रहजाते दूर पहन लेते असफलताकी ताज I असफल बनजाते I जो कहीं पे सम्भब हो सक्ताथा I बिफलताको अपनालिये I जहां दृढ़ मनोबल की आबस्यकता रहता दुर्बलताको स्विकारलीये I


मन की जित .....
मन की जित .....





मन की जित.....

घोर घनघटा
काले बादल उड़ता
कभी खर कभी धीर
अपनी नीली सफ़ेद रंगकी
पंख हिलाके समझ्लेते सस्ता  
बहत सस्ता मापना आकाशकी दूरता !!

उस वक्त बेसक रहता होशला
अपनी पंखपर और शारीरिक बल पर
मनमें भी उठता होगा असरंती भावनाएं
कुछोंके रहता बास्तबिकताका परिसीमा
और ढ़ेरों होते अबांतर आते चलेजाते !!

आँख बन्द करके स्वप्न देखना किसे मना
किसीको अछि नहीं लगता दोस्तों
जो हे एक सरल और सहज ब्यापार सस्ता
अक्सर कुछ क्षण केलिए खुसी तो देता
मजाका माहोल बनाके हर्ष परोसता !!

जब नींद होजाता भंग आँखें खोलता
बास्तबिकता का संज्यान होता लहू झरता
सर में ये सोचके चक्कर आही जाता
ये संका करके की मेरेसे ये नहीं होसकता !!

मनसे हाराहुआ कभी नहीं जीतता दोस्तों
जिनके अपनी आप परभी बिस्वास नहीं होता
शक्ति सामर्थता होतेहुए भी हार मानलेता
अपनीको पहचान्नेकी कोशिश नहीं करता !!

भुलजाता अपना अंगीकार बद्धताको
ऐसे बेकार अपना अस्थित्वको मिटादेता
जब और कुछ धनात्मक प्रयास करताहोता
तो सफलता अबस्य मिलता मगर उलटा फल होता !!


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