आज दीपावली
आज
दीपावली
आज
दीपावली
ये
रौशनी की तैहार
मनालो
दिल खोलके
अहम्
करके परिहार II
लाके
आया है नया उल्लास
साथ
में है फिर प्यार
अंग
अंग में सिंचते जाता
नूतनताका
बारिधार II
दीपकका
तो है ये तैहार
इज्वलताकी
समाहार
तमस
ऊपर प्रकाशका ये
संकेत
है पलटवार II
मरजगत
में ज्न्यान सार
अज्न्यानता
है अन्धकार
ज्न्यान
प्रदीपको प्रज्वलन करलो
आभाष
है ये मूलाधार II
निहित
यहां संस्कार संस्कृति
साधू
सोच और बिचार
अन्याय
ऊपर न्याय की प्रहार
सुचाता
ये बार बार II
एसेतो
नाता राम राज्यसे
न्याय
बिधि सुबिचार
दीक्षित
करके आत्मारामको
जिबनको
करलो साकार II

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