परिबर्तन एक आह्वान

 

परिबर्तन एक आह्वान

 

परिबर्तन एक आह्वान
परिबर्तन एक आह्वान 

इसी मर जगत में

सबकुछ परिबर्तनशील होता

सीबाय एक भगबान व है सत्य

हमेसा एकजैसी स्थिति में रहता II

 

कालकी कराल बिध्व्नंस कारी रूप

लोहे में चाढादेता कालिमा

जिसे लोग अक्सर कहते कलंक

समंदर भी लंघन करता सीमा II

 

परिबेश में आता बदलाव

कभी नरम फिर कभी गरम

रंग में लाता भी बिभेदता

अछाबुरा  फल लाता अमूमन II

 

कहते हैं पिंड ब्रम्हांड एकसम

जब गुण में बदलाव आता

नूतनता लाके उंचाई पर लेजाता

सफलताका बड़ा एक अंश बनता II

 

इसीलिए बदलावको स्वीकारना

आह्वान समझकर ग्रहण करना

बुद्धिमत्ताका परिचय उत्तम काम

कियुकी ये किसीको बनाता इंशान सफलतम II

 

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