चिंटी और मधुकर
एक
चिंटी
रहता
हमेसा ब्यस्त
भागता
है इधर उधर
जहां
भी है मंजिल की कहर
इमानदारी
से गर करे बिचार
तो
व बढ़ता सफलता की ओर II
इधर
भी देखें तो कैसे पुष्पसे
मधु
चूसता है मधुकर
किसी
और केलिए मधु इकठ्ठा करता
लाता
सजत्ना अपना घर
जिसे
फिर लेजाता हरण कर
कोई
बुरी प्रभाव पड़ता नहीं ऊपर
व
फिर भी बिचलित नहीं होता
आपनी
बदनसीब हालात पर II
केवल
चलताजाता ध्यान में ये रखकर
अबस्य
सफलता मिलेगा भले दूर
संघर्ष
तो है जीबन करना होगा
बढ़ाना
होगा दक्ष्यता इसी की उपर
सफलताके
लिए ध्यान चाहिए दक्ष्यता पर II

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