तुममें है सबकुछ
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| तुममें है सबकुछ |
जबसे गया है
व किशोर बयस मेरा
तबसे काहाँ है सुकून
दिल दुःखी संतापित मन
पता है नहीं खुदको क्या व धन
किसलिए मुझमें व बेताबी पागलपन ।
आज मेरा हुआ है युबाबस्थामें गमन
अबभी पहले जैसी दौड़ताजाता अनुक्षन
कुछ ढूंढता रहता चुपचाप मेरे मनहि मन
व कुछ और है ही नहीं बिना सुस्तशांत मन ।
जिबनमें प्रयासकी कोई कमी है नहीं
कर चुकाहुँ बहुत कुछ गिनतीमें अगणन
अब भी प्रयास जारी है इसे पानीको है मन
मगर बाहर मिलती काहाँ कास होताये ज्ञान
मैं ऐसे क्यों गबाडालता इतने सारे समय धन
आज अंदरकी गुरु अभीग्न्यता जबये बताडिया
आत्मा तुम्हारा तो शांतुस्टी भी होगी यंहा काहाँ
क्यों बेकार ढूंढ़तेहो इधर उधर बेबजह अकारण
जो तुम्हारे पास अब है इसे तो अपनाकर देखलो
रुचि बढालो अपना इनपर देदो सकारात्मक ध्यान
सोच अपनिआप बदल जाएगा संतुष्टि कहींहै नहीं इंहा
कोई अंदरसे बोलता सबकुछ है तुम्हारे में ढूंढ़तेहो काहाँ ।

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