जमानें में क्या बुराई .....
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जमानें में क्या बुराई ..... |
जमाने
में क्या बुराई
मुझे
क्या पता
मैंहूँ
सच्चा होता अच्छा
सोचता
ही जाता II
कामपे
सदा होता नजर
करता
ही जाता
फलमें
कभी रखता नहीं
कोई
बासता II
सफलता
तो मिलता अक्सर
मिलता
बिफलता
मगर
कभी रुकता नहीं
चलता
रहता II
ध्यान
और धारणा मेंहै
मेरी
आसता
सुखद
साथे शान्तिकी जो
होता
रास्ता II
परिबेश
से क्या लेना है
देखते
ही जाता
दिलमें
उसे लेता नहीं
जो
दुःख ही देता II
कभी
मुझे किसके लिए
क्यों
रोना पड़ता
मेरे
मनकी आयत बिना
दोषी
बनजाता II

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