कर्मसे मत भागना
किसीके पीछे भागना
उसीकी सान्निध्य पाना
या फिर नाकामयाब होना
कोई है नहीं बुरिबात
दोस्तों
क्युंकी आशाही आशाका फल्बत
होता
आशाहिं हममें लाता सक्रियता
II
ये सक्रियता जिबनकी नामहै
दोस्तों
स्थानुता होता मौत की तरह
समान
निस्चलसा निस्तब्ध सा बन
जाना
कोई नहीं रखता कोई भी मएना
II
जिबनतो हमेसा होता सम्भाबना
कभी किसी मोडपे हारजाना
फिर कभी लौटके बिजेता बनना
जीबनहै चलता रहता ये
शिलशिला
कभी किसी दरके मारे मैदान
छोड़ना
बिलकुल गलत कभी ये मत करना
क्यूंकि मानबताको है बजाय
रखना
ये गया तो जीबन बन जाएगा
बेकार
तब जीबन होगा इतर प्राणीसे
परिगना II
गीता में श्री कृष्ण जीने
करते हैं बयाँ
कभीभी अपना करोति कर्मसे मत
भागना
जब कभी इसे करोगे तुम
अबमानना
इंसानियतकी अर्थ बदलके
बनेगा भूतखाना II

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