आपको बताना

 

आपको बताना

आपको बताना


मैं तुम्हें क्या बताऊँ?

तुम्हें में क्या कहूँ,

उस समय जो दोनों को मिलाया,

काहांसे लाके संजोग किया

तुम और मुझमें लाया अंतरंगता

दोनों में बनाया निजोड संबंध

जहांसे स्वतः बहता मकरंद

जो हमलोग पांन रते हरदम,

उल्लसित बनके भावबीहवालित होते

तन मनकी सारी पीड़ा भूल जाते,

आहिस्ता एक दूसरे में समाजाते।


मैं इसे कैसे कहूं सिर्फ एक भावना?

जो कभी भी नहीं आता तुम्हारे बिना

तुमतो बास्तव में मेरे स्थगित मनकी,

चंचल ऊर्जामय ज्योतिबान उन्मादना 

तुम्ही से मेरा पुनर्जन्म अद्भुत व महिमा

तुम शक्ति हो रति हो औऱ कहूंतो प्रगति

 मेरे तन मन भावनाओंकी अटूट हिस्सा

असमर्थ मैं तुम्हे ऐसे कया नाम दूं?


मेरे प्रेमकी आधार है तुम,

प्रति पाराबारकी निल जलराशि,

पहली बारिश्कि बूंदे हो तुम,

दिलसे निकलनेवाले प्रेम तटिनी,

निल गगनकी इंदधनुष मनोहर,

मेरे ब्याथित मनको ठंडक देनेवाली

चंदन बन की सुबासित पबन हो तुम

अमाबास में सही राह दिखाने वाली

स्वछ शुभ्र शांत चन्दमा हो तुम

जिबनकी अटूट हिस्सा तुम्हे क्या कहूं?


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