स्वर्ग और नर्क

 

स्वर्ग और नर्क
स्वर्ग और नर्क




एकथा राजा बड़ा महान

बलबन, धनबन,ज्यांन

चारगुण में परिपूर्ण जोथा

देखा रहाथा स्वाभिमान ।।


एकदिन ऐसे ताछलय करके

पास हँकारे मंत्री महान

बोलता ऐसा सुनो लो मुझको

खोलके जरा अपना कान ।।


आज में देखा एक ऐसा सपना

हिलादेता जो मेरा मन

कामके बलपर पता नहीं कियूं

तूम्हे हुआ हे नर्क गमन ।।


तुम्हे पता हे नर्क की आचार

बिचार नियम  बिधान

नर्क गमन जो पीड़ा सहन

हे कोई और भी समाधान?


मैं जो सपना अद्भुत देखा

परे हे मेरा चिंतन

स्वादिष्ट भोजन सुसज्जित था

चम्मच कारण परिसान ।।


बास्तब में हे दुर्लभ चम्मच

लमाई बिलकुल देह समान

ब्यथा मनमें कारीगर का

कम भी नाथा ओजोन ।।


चम्मच थाहि अति अद्भुत

लंबाई लगभग दो कदम

मुख में इसीसे खाना लेना

बिलकुल नाथा आसान ।।


गरमा गर्म भोजन सारे

कम भी नाथा उत्तापन

ब्यबस्थित सारे आगे अपना

खाजा बोलता मनहि मन 

लेकिन बिपरीत चम्मच साधन

करना नाबने भोजन ।।


ऐसी हालात ना पाए कोई

यहितो नर्क की गमन 

सामने सारे होकर भी यूं

मिटता नहीं भुखापन ।।


राजाके सारे बातें सुनके

मंत्री बोलता बचन

मै व नाथा दूसरा कोई है

ठीकसे करलो स्मरण ।।


मै जब होता इसी हालात में

इस्तेमाल होता साधन

खाना खिलाते एक दूसरे को

दूरसे रहकर हर जन ।।


बास्तब में ही मर जगत में

परोपकारकी गुण महान

प्रचार करके इसी गुण को

नर्क को बनाता स्वर्ग स्थान ।।


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