दिल खोलकर
दिल खोलकर
कभी-कभी इस जीवन में
कितने ही रिश्ते
बनाए गए हैं, अधिकांश अस्थायी हैं
पानी बूंदों की तरह मिल जाता है
कुछ और रिश्ते हैं
अनजाने में ऐसा
स्वचालित रूप से बन जाता
जब समय समाप्त हो जाता
हम एक विशेष आत्मा से मिलते हैं
हमे व कौन बहुत महसूस कराता है
दिल खोलकर आह्वान करता
दिल को अंदर तक चीर कर
लगभग अतिप्रवाह के लिए।
हम दोस्ती का प्याला पीते हैं
हम अवसरों की तलाश करते हैं
एक दुसरे को समझ लेते हैं
हालांकि इसका स्वाद रूबी वाइन
जैसा होता, फिर भी हम नशे में नहीं हैं
और आप तो अपने दिल में जानते हैं
कितना इमोशनल है वो वक्त और
भावनाएँ हैं, उन्हें जाने दो
मुलाकात दिव्य थी,सबकुछ भब्य है।
यह आत्मा जो बसती है
आपके दिल में
लगभग आप में, बहुत करीब
कोई फर्क नहीं पड़ता कि मतलब क्या
आप क्या चाहते हैं,
इसे बाधित नहीं किया जा सकता
कोई दूरी नहीं जीती जा सकती
दिल में एक आंतरिक चिंगारी
हमें करीब लाता है,निबिडताकी ओर
हर पल, सब सुखद
पवित्र कब्र बन जाता है।
यहाँ यात्रा शुरू होती है
एक साथ जीवन जीने के लिए
अनंत प्रेम का संदेश
आगे बढ़ता है,भावनाओं को
जिसमें आप दोनों होंगे
एक दूसरे का प्रतिबिंब
चारों ओर बिखरना
शाश्वत प्रेम के पथ पर चलें
अनंत काल ,अनंत सुख के लिए।
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