आग

 

आग
आग


मैं उस शाम का चिराग था,

 जब शाम आती है तो मुझे ढूंढा जाता है,

भगवान की संध्या आरती के लिए, 

मुझे जलना होता,

मंद रौशनी से सजी आरती,

भगवान की पूजा करता हूं, मंगल का संदेश,

यह सभी को दिखाता है,शिखाता हे एक बात

 अगर तुम्हारे अंदर कुछ अच्छाईयां हे तो, 

सौभाग्य बहुत दूर नहीं है,

मेरे अंदर की आग ने मुझे ये सिखाया,

अगर चमकना है तो जलाना ही होगा,

कबूल करना मुश्किल है,

जिसके बारे में कहाजाता,

कष्ट करनेसे कृष्ण मिलता।



 मुझे मकसद मिल गया,

 वह कभी क्यों नहीं पूछता,

 न जलने से इंकार करो, न चाहो

 हमेशा कमजोर रहो,

 थोडा उदास होना, खिन्न होना,

 किसी दुःख या कारण के लिए,

 मैंने पता लगाने की कोशिश की,

 जैसे आप हैं

 तुम्हें ऐसे देखने की कोशिश में,

 अब पढ़ना, चाहना,

 समय की रेत में खो जाना,

 मुझे लगता है कि पारी चली गई है,

 भाषण के अंत में, मैं अवाक होजाता,

 और उसके साथ मेरी चाहत, 

 मेरा जुनून आता है,मेरा कारण है

 मेरी आशाएं और आकांक्षाएं,झपटमें

फिसल गया, लेकिन कोई शक नहीं,

मुझमें दिल फैलाने की हिम्मत है,

उम्मीद है किसी दिन फिर मिलेंगे,

उस दिन को फिर से जीने के लिए,

इरादा होना जरूर होनी चाहिए,

जाने के कई रास्ते हैं,चलना पड़ेगा,

जीने की वजह ढूंढ़ने के लिए,

दुनिया में सभी को जीने का अधिकार है,

मेरे पास दुनिया में एक जगह है,जानता हूं,

 लेकिन मुझे इसे ख़ुदको खोजना है,

आग और धुएं में अंतर खोजना है।




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