एकांत मगर खुश हूं
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| एकांत मगर खुश हूं |
एकांत मगर खुश हूं
सिंगल हूं नकोई झंझट
नदिया की मै धारा हूं
चलता रहता मंजिलकी ओर
पहले नहीं थकता हूं
महत्व मेरा काम में सदा
कामको सार्थक करता हूं
मेरा कामका मै हूं मालिक
मैं हीं उनको चुनता हूं।
एकांत मगर खुश हूं
उपभोक्ता होना पसंद नहीं
उत्पादक का चाहत रखता हूं
ध्यान मेरा कभी भटकता काहाँ
कार्योंपे हमेसा नजर रखता हूँ
आम नहीं, निःसंदेह में बेहतर हूं
मूल्य समयकी पता हे मुझे
बर्बाद नहीं करता हूं, कल्पना करके
कुछ नयासा रचना करहि लेताहूं।
एकहि स्थान पर कभी नहीं फंसता
मैं निल गगनका पंछी हूं,मुक्त हूं
इधर उधर यात्रा करके बेहतर तलाशना
जानता हूं, मूर्ख कभी हूं नहीं औरोंको
समझना जानता हूं, ध्यान भी सब पर
रखता हूं,अबिबाहित हूं,परिबार मेंहीं
रहता हूँ,एकांत हूं मगर खुश हूं।
स्वाबलंबी हूं, आत्म निर्भर
किसीसे हाथ ना पताता हूं
परजीबी होना दुर्बलता है
कभी मैं नहीं करता हूं
दृढ़ हे मेरा आत्म बल
अपना पथ पर चलता हूँ
किसी भी प्रकार नकारात्मकता को
प्रश्रय नहीं देताता हूं,मेँ अच्छी हूं
तंदरुस्त हूं, बेहतर जीबन जीता हूं
मुक्त हूं,एकांत हूं मगर खुश हूं।

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