लिली की इच्छा

 

लिली की इच्छा
लिली की इच्छा


पहाड़ों की चांदनी में खिली,

कुमुदिनी, सुंदर सी विली। 

सूर्योदय को छू कर उठे,

सपने सजाएं, अधरों पर मिठे। 


नीलम स्वर्णिम आकाश छुए,

सुगंधित हवा में भर जाए। 

हवा के संग नाचे खिली,

चांदनी रातों में प्रेम रंगी। 


ज़मीन के नीचे जड़ जमी,

संबोधित की अपनी तनी। 

मौसमों के साथ बदली रूप,

हो गयी परिवर्तन की भूप। 


प्रत्येक उषा को एक मंत्र,

फूलों के पंख बन कर चन्द्र। 

खिली बाग़ के राजकुमारी,

सूर्य की किरणों के संग खेली। 


गंधित बादलों और धूली,

साँवले बचपन के मोहे भूली। 

आकार बदल, पंखी बनी,

खुले आसमान में खूबसूरत रानी। 


हर मूर्छा पर आकर रही,

ख्वाबों को छू दिया सपनी। 

विचारों के संग उड़ जाए,

एक अद्भुत परिवर्तन स्वयं महसूस करे। 


सपनों के झरोखे से देखा,

मन की कल्पनाएं खुद समझा। 

सूरज के साथ बढ़ी आकार,

दिल में जगी प्यार की आगार। 


आओ दोस्तों, सुनो यह कहानी,

आशा के संग बढ़े जवानी। 

कुमुदिनी जैसी, सपनों की माला,

हर पंख धड़कती, जीवन का गीत गाला। 


ध्यान में रखें खुद की पीढ़ी,

कुमुदिनी की कल्पना, पंखों की रीढ़ी। 

हर दिल में छिपी जादूगरनी,

जीवन का अभिव्यक्ति, चरम ख्वाहिश की कहानी। 

लिली की इच्छा
लिली की इच्छा

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