अंतिम मुलाकात ❤️ | दिल छू लेने वाली विदाई प्रेम कविता | Emotional Hindi Love Poem
# ❤️ **अंतिम मुलाकात**
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| अंतिम मुलाकात |
आज की शाम कुछ अलग थी,
हवा में एक अजीब सी खामोशी थी,
जैसे वक्त खुद धीरे चल रहा हो,
जैसे हर पल जानता हो
कि यह हमारी अंतिम मुलाकात है।
सूरज ढल रहा था धीरे-धीरे,
आसमान में रंग घुल रहे थे,
और हम दोनों
एक ही बेंच पर बैठे थे,
पर दिलों के बीच
अनकहे शब्दों का समंदर था।
तुम्हारी आँखों में
हजारों सवाल थे,
मेरी नजरों में
हजारों जवाब,
लेकिन आवाज किसी की भी
होंठों तक नहीं आ रही थी।
मैं सोच रहा था —
क्या यह सच है?
क्या यह वही पल है
जिससे मैं हमेशा डरता था?
या यह सिर्फ एक सपना है
जो टूटने वाला है।
तुमने हल्के से मुस्कुराकर पूछा,
“कैसे हो?”
और मैं हंस दिया —
जैसे कुछ बदला ही न हो,
जैसे दिल के अंदर
कोई तूफान नहीं चल रहा।
हमने मौसम की बात की,
पुरानी यादों की बात की,
पर उस सच का नाम नहीं लिया
जो हमारे बीच बैठा था।
तुम्हारे हाथ
मेरे हाथों के पास थे,
बस एक छोटी सी दूरी,
और उस दूरी में
पूरा एक संसार छुपा था।
कितनी बार चाहा
कि तुम्हारा हाथ पकड़ लूं,
लेकिन डर था —
कि शायद वह आखिरी स्पर्श
मेरे दिल को तोड़ देगा।
तुम अचानक चुप हो गई,
और मैंने देखा
तुम्हारी आंखों में
नमी की हल्की सी चमक।
“हम ठीक हैं ना?”
तुमने धीरे से पूछा।
मैंने सिर हिला दिया,
लेकिन अंदर से आवाज आई —
नहीं, हम ठीक नहीं हैं।
समय धीरे-धीरे गुजर रहा था,
हर सेकंड
दिल पर दस्तक दे रहा था।
मैं तुम्हें देख रहा था,
जैसे पहली बार देख रहा हूँ,
तुम्हारी मुस्कान,
तुम्हारी पलकों की हलचल,
तुम्हारी सांसों की लय।
सोच रहा था —
क्या यह आखिरी बार है
जब मैं तुम्हें इतने करीब महसूस कर रहा हूँ?
हवा चली,
और तुम्हारे बाल
मेरे चेहरे को छू गए।
उस पल में
पूरा अतीत लौट आया —
पहली मुलाकात,
पहली हंसी,
पहली बारिश।
तुमने धीरे से
मेरा हाथ पकड़ लिया।
बस एक पल के लिए,
लेकिन उस स्पर्श में
सालों की कहानी थी।
दिल जोर से धड़कने लगा,
जैसे कह रहा हो —
रोक लो उसे,
कह दो सब कुछ।
पर शब्द…
शब्द कहीं खो गए थे।
“शायद यही सही है,”
तुमने धीरे से कहा।
और मैं समझ गया —
यह विदाई है।
आसमान अब गहरा हो चुका था,
और हमारे बीच
एक अजीब सी शांति थी।
मैं तुम्हें देखता रहा,
जैसे यादों में तुम्हारा चेहरा
हमेशा के लिए सहेज रहा हूँ।
तुम उठी,
धीरे से मुस्कुराई,
और कहा —
“ख्याल रखना।”
बस इतना ही।
कितना छोटा वाक्य,
लेकिन उसमें
एक पूरी दुनिया छुपी थी।
मैं भी खड़ा हुआ,
पर कदम भारी थे।
हम कुछ पल
सामने खड़े रहे,
जैसे वक्त रुक गया हो।
तुमने एक बार फिर
मेरा हाथ दबाया —
हल्का सा,
लेकिन इतना गहरा
कि दिल तक उतर गया।
फिर तुम मुड़ी,
और चल दी।
मैं देखता रहा,
जब तक तुम नजरों से ओझल नहीं हो गई।
उस पल समझ आया —
कुछ अलविदा
कभी पूरी तरह नहीं होते।
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| अंतिम मुलाकात |
तुम चली गई,
लेकिन हवा में
तुम्हारी खुशबू रह गई।
मैं अकेला था,
पर यादें मेरे साथ थीं।
अंतिम मुलाकात
दरअसल अंत नहीं थी,
वह एक कहानी की शुरुआत थी —
जो अब सिर्फ दिल में जीनी थी।
और आज भी
जब शाम ढलती है,
मैं उसी बेंच को याद करता हूँ,
जहाँ हमने बिना कहे
सब कुछ कह दिया था।


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