❤️ तू ही मेरी शुरुआत, तू ही मेरा अंत — एक अनकही मोहब्बत की कहानी

❤️ तू ही मेरी शुरुआत, तू ही मेरा अंत — एक अनकही मोहब्बत की कहानी


तू ही मेरी शुरुआत, तू ही मेरा अंत


तेरी आँखों के उस पहले सवाल से
 शुरू होती है मेरी कहानी,
जहाँ शब्दों ने जन्म लेने से पहले ही
धड़कनों की भाषा सीख ली थी।

मैंने तुझे पहली बार देखा तो लगा
जैसे समय ने अपने कदम रोक लिए हों,
जैसे हवा ने धीरे से कान में कहा हो —
“यही है वो, जिसका इंतज़ार था।”

पर यह सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं,
यह उन पलों की यात्रा है
जो अनकहे रहकर भी अमर हो जाते हैं।


तू आई तो मौसम ने करवट ली,
धूप ने अपना रंग बदल लिया,
और मेरी खिड़की पर बैठी उदासी
चुपचाप उड़ गई।

तुझे शायद पता भी नहीं,
पर तेरी हँसी का एक टुकड़ा
अब भी मेरी मेज़ की दराज़ में रखा है,
जहाँ मैं हर रात उसे खोलकर
थोड़ा-सा सुकून निकाल लेता हूँ।

तू सोचती होगी —
इतनी-सी मुलाकात में भला क्या बदलता है?
पर कभी किसी शांत झील में
एक कंकड़ फेंक कर देखना,
लहरें किनारों तक जाती हैं।

तू वही कंकड़ थी,
और मैं वो झील
जिसने पहली बार अपने भीतर
हलचल महसूस की।


रातों में जब शहर सो जाता है,
मैं चाँद से तेरी बातें करता हूँ।
वो मुस्कुराकर पूछता है,
“क्या सच में इतना प्यार करते हो?”

मैं कहता हूँ —
“प्यार शब्द छोटा है,
ये तो इबादत है।”

तू जानती है?
तेरा नाम मेरे होंठों पर
किसी मंत्र की तरह उतरता है।
हर बार जब मैं उसे दोहराता हूँ,
मेरी रूह थोड़ी और पवित्र हो जाती है।


एक दिन अगर तू पूछे
कि मैं तुझसे क्यों प्रेम करता हूँ,
तो मेरे पास कोई तर्क नहीं होगा।
प्रेम गणित नहीं है,
जहाँ उत्तर सटीक निकाले जा सकें।

ये तो बारिश है —
बिना वजह बरसती है,
बिना इजाज़त भीगाती है,
और बिना आवाज़ दिल में उतर जाती है।

तेरी याद भी ऐसी ही है।
अचानक चली आती है,
और मैं भीगता रहता हूँ
बिना छतरी के।


तू दूर है —
इतनी दूर कि हाथ बढ़ाऊँ तो
सिर्फ़ हवा मिलती है।
पर इतनी पास भी कि
आँखें बंद करूँ तो
तेरी धड़कन सुनाई देती है।

कितना अजीब है ना?
दूरी मीलों में मापी जाती है,
पर नज़दीकियाँ एहसासों में।

हमारे बीच जो है,
वो किसी नक्शे पर दर्ज नहीं,
पर हर सितारा उसे जानता है।


मैंने तेरे लिए
अपने सपनों का एक शहर बसाया है।
जहाँ सुबहें तेरी आवाज़ से खुलती हैं,
और शामें तेरी बाँहों में ढलती हैं।

वहाँ कोई शोर नहीं,
सिर्फ़ तेरी हँसी की गूँज है।
कोई भीड़ नहीं,
सिर्फ़ हमारे कदमों की आहट है।

उस शहर में
मैंने तेरे नाम की एक सड़क रखी है,
जहाँ हर मोड़ पर
एक नई याद खड़ी है।


पर प्रेम सिर्फ़ मुस्कान नहीं होता,
उसमें इंतज़ार भी होता है।

मैंने इंतज़ार को भी गले लगाया है,
जैसे कोई माँ
शरारती बच्चे को लगाती है।
क्योंकि मुझे पता है,
इसी इंतज़ार के बाद
तू मिलेगी।

कभी-कभी थक जाता हूँ,
सोचता हूँ —
क्या सच में हमारी कहानी
मंज़िल तक पहुँचेगी?

फिर तेरी आँखों का वो यकीन याद आता है,
और मैं फिर चल पड़ता हूँ।


तेरे बिना दिन अधूरा लगता है,
जैसे कविता बिना तुक के,
जैसे नदी बिना पानी के,
जैसे मंदिर बिना दीप के।

पर तू है —
मेरी हर अधूरी पंक्ति का पूर्ण विराम।

तेरे होने से
मेरी दुनिया का अर्थ बदल गया है।
अब मैं सिर्फ़ जीता नहीं,
महसूस भी करता हूँ।


अगर कभी जीवन हमें
अलग राहों पर ले जाए,
तो याद रखना —
मैंने तुझसे सच्चा प्रेम किया था।

इतना सच्चा
कि उसमें कोई शर्त नहीं थी,
कोई दावा नहीं था,
सिर्फ़ समर्पण था।

मैंने तुझे पाने की ज़िद नहीं की,
मैंने तुझे खुश देखने की दुआ की।

और शायद
यही प्रेम का सबसे सुंदर रूप है।


पर कहानी यहाँ खत्म नहीं होती…

क्योंकि प्रेम का अंत
वियोग में भी नहीं होता।

अगर कभी तू किसी और के साथ
हँस रही होगी,
तो यकीन मान,
मेरी दुआ तेरे साथ होगी।

और अगर कभी तेरी आँखें नम हों,
तो समझ लेना —
कहीं दूर
कोई तेरा नाम लेकर
खामोशी से रो रहा है।


पर मैं उम्मीद चुनता हूँ।

मैं उस सुबह का इंतज़ार करता हूँ
जब तू अचानक सामने खड़ी होगी,
और कहेगी —
“इतना इंतज़ार क्यों किया?”

मैं मुस्कुराकर कहूँगा —
“क्योंकि यकीन था कि तुम आओगी।”

उस दिन
सारे सवाल खत्म हो जाएँगे,
सारी दूरियाँ मिट जाएँगी,
और समय फिर से
हमारे लिए ठहर जाएगा।


प्रेम कोई कहानी नहीं
जो किताबों में बंद हो जाए।
ये तो वो आग है
जो राख बनकर भी
गरमाहट देती है।

तू मेरी उसी आग की लौ है,
जो बुझकर भी
मुझमें जलती रहती है।

और जब तक ये लौ है,
मैं अधूरा नहीं हूँ।


अगर तू ये कविता पढ़ रही है,
तो जान ले —
हर शब्द में तू बसी है।
हर रूपक में तेरा चेहरा है।
हर विराम में तेरी साँसें हैं।

मैंने इस कविता को
सिर्फ़ लिख नहीं दिया,
मैंने इसे जिया है।

और जब आख़िरी पंक्ति आएगी,
तब भी कहानी खत्म नहीं होगी —
क्योंकि प्रेम
कभी समाप्त नहीं होता।


आख़िर में बस इतना —

अगर जीवन एक लंबी यात्रा है,
तो मैं चाहता हूँ
उसके हर मोड़ पर
तेरा हाथ मेरे हाथ में हो।

अगर खुशियाँ मिलें,
तो हम साथ हँसें।
अगर दुख आएँ,
तो हम साथ रोएँ।

और जब एक दिन
सफ़र पूरा हो,
तो लोग कहें —
“इन दोनों ने सच में प्रेम किया था।”


❤️ तू ही मेरी शुरुआत, तू ही मेरा अंत



ये कविता यहीं रुकती है,
पर मेरा प्रेम नहीं।

तू जहाँ भी है,
जैसी भी है,
मेरी हर धड़कन में
तेरा नाम लिखा है।

और जब तक ये धड़कन चलती रहेगी,
ये कहानी भी चलती रहेगी…

क्योंकि तू ही मेरी शुरुआत है,
और तू ही मेरा अंत। ❤️

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