तुम मेरी अधूरी कविता हो
**तुम मेरी अधूरी कविता हो**
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| तुम मेरी अधूरी कविता हो |
तुम मेरी अधूरी कविता हो,
जिसे मैंने हर रात लिखा,
हर सुबह मिटा दिया—
जैसे किसी ख्वाब को आँखों से गिरने से पहले ही
दिल ने पकड़ लिया हो।
तुम वो पंक्ति हो
जो हर बार शुरू तो होती है,
पर खत्म होने से पहले
रुक जाती है कहीं—
ठीक वैसे ही
जैसे हमारी कहानी।
मैंने तुम्हें शब्दों में ढालना चाहा,
पर हर बार एहसास
शब्दों से आगे निकल गया।
तुम्हारी मुस्कान,
मेरी कलम से तेज़ थी,
और तुम्हारी खामोशी—
मेरे हर वाक्य से गहरी।
तुम मेरी अधूरी कविता हो,
पर जानती हो?
अधूरी चीज़ों में एक अजीब-सी
पूरी होने की जिद होती है।
जैसे आधा चाँद
पूरी रात को रोशन कर देता है,
वैसे ही तुम—
मेरी अधूरी कहानी में भी
पूरा आसमान भर देती हो।
कभी-कभी सोचता हूँ,
अगर तुम पूरी हो जाती
तो शायद इतनी खूबसूरत न लगती—
क्योंकि जो पूरा होता है,
वो ठहर जाता है,
और जो अधूरा होता है—
वो हर पल नया जन्म लेता है।
तुम वो अधूरा ख्वाब हो
जिसे मैं हर रात देखता हूँ,
और हर सुबह
फिर से देखने की उम्मीद रखता हूँ।
तुम वो अधूरी धुन हो
जिसे मैं गुनगुनाता हूँ,
पर कभी गा नहीं पाता—
क्योंकि डरता हूँ
कि कहीं पूरी हो गई
तो उसका जादू खत्म न हो जाए।
तुम मेरी अधूरी कविता हो,
जिसमें हर बार
कुछ नया जोड़ने की ख्वाहिश रहती है—
पर हर बार
कुछ छूट जाता है।
और वही जो छूट जाता है,
वो ही तो सबसे खूबसूरत होता है।
तुम्हारी आँखों में
मैंने जो कहानी देखी थी,
वो कभी पूरी नहीं हुई—
पर उसकी अधूरी झलक ही
मेरे लिए पूरी किताब बन गई।
तुम्हारे साथ बिताए
वो अधूरे पल—
जो कभी ‘हमेशा’ नहीं बन पाए,
वो आज भी
मेरे दिल के सबसे पूरे हिस्से हैं।
कितना अजीब है ना?
जो मिला ही नहीं पूरी तरह,
वही सबसे ज्यादा अपना लगता है।
तुम मेरी अधूरी कविता हो,
जिसमें हर शब्द
तुम्हारी याद से जन्म लेता है।
कभी तुम बारिश बनकर आती हो,
और मेरी स्याही को बहा देती हो—
तो कभी धूप बनकर
हर अधूरे अक्षर को
सोने-सा चमका देती हो।
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| तुम मेरी अधूरी कविता हो |
मैंने कोशिश की थी
तुम्हें पूरा लिखने की—
पर हर बार
तुम खुद ही
एक नई अधूरी पंक्ति बन गई।
शायद तुम पूरी होना ही नहीं चाहती,
या शायद
मैं ही तुम्हें पूरा करना नहीं चाहता।
क्योंकि जो अधूरा होता है,
वो कभी खत्म नहीं होता—
और मैं तुम्हें
कभी खत्म नहीं करना चाहता।
तुम्हारी यादें
मेरे हर शब्द के बीच
छुपी रहती हैं—
जैसे कोई राज
जिसे मैं खुद से भी छुपाता हूँ।
तुम्हारा नाम
मेरी हर अधूरी पंक्ति के अंत में
चुपचाप लिखा रहता है—
बिना आवाज़ के,
बिना किसी दावे के।
तुम मेरी अधूरी कविता हो,
जिसे पढ़ने के लिए
दिल चाहिए—
दिमाग नहीं।
क्योंकि इसमें तर्क नहीं,
बस एहसास है—
और एहसास हमेशा
पूरा नहीं होता।
तुम्हारे बिना
मेरी हर कविता अधूरी है,
पर तुम्हारे साथ
वो और भी अधूरी हो जाती है—
क्योंकि तब
मैं तुम्हें खोने से डरता हूँ।
तुम वो अधूरी कहानी हो
जिसका कोई अंत नहीं—
और शायद यही
तुम्हारी सबसे बड़ी खूबसूरती है।
अगर तुम पूरी हो जाती,
तो शायद
मैं तुम्हें भूल जाता—
पर तुम्हारा अधूरापन
मुझे हर दिन
तुम्हारी ओर खींचता है।
तुम मेरी अधूरी कविता हो,
जिसे मैं कभी खत्म नहीं करना चाहता।
मैं चाहता हूँ
कि तुम यूँ ही अधूरी रहो—
ताकि मैं तुम्हें
हर दिन नया लिख सकूँ,
हर रात नया महसूस कर सकूँ।
तुम्हारे अधूरेपन में
एक अनंतता है—
जैसे कोई रास्ता
जो कभी खत्म नहीं होता,
पर हर मोड़ पर
कुछ नया दिखाता है।
तुम्हारे साथ
मुझे ‘पूरा’ होने की ज़रूरत नहीं—
क्योंकि तुम्हारा अधूरापन ही
मुझे पूरा कर देता है।
तुम मेरी अधूरी कविता हो—
और मैं
तुम्हारा अधूरा कवि।
हम दोनों
एक-दूसरे में
कभी पूरी तरह नहीं समा पाए—
पर शायद
यही हमारी सबसे बड़ी
कविता है।
क्योंकि जो अधूरा है,
वही तो
हमेशा जीवित रहता है।
और मैं चाहता हूँ—
कि तुम
मेरी हर जन्म की
अधूरी कविता बनो।
ताकि मैं
हर जन्म में
तुम्हें फिर से लिख सकूँ,
फिर से महसूस कर सकूँ,
फिर से अधूरा रह सकूँ।
क्योंकि अब समझ आया है—
पूरा होना
इतना खूबसूरत नहीं होता,
जितना अधूरा रहना।
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| तुम मेरी अधूरी कविता हो |
तुम मेरी अधूरी कविता हो—
और यही
तुम्हारी सबसे बड़ी
खूबसूरती है।



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