चुप रहकर भी सब कह जाना

** चुप रहकर भी सब कह जाना **


चुप रहकर भी सब कह जाना


तुमने कभी कुछ कहा नहीं,

और मैंने सब सुन लिया

यही तो हमारी कहानी है,

जहाँ शब्दों की नहीं,

खामोशियों की जुबान चलती है।


तुम्हारी आँखों ने

जब पहली बार मुझे छुआ था,

वो कोई इज़हार नहीं था

पर उस एक नजर में

हज़ारों कबूलनामे छिपे थे।


तुम चुप रही…

पर तुम्हारी धड़कनों ने

मेरे नाम का जिक्र किया,

इतनी धीरे से

कि हवा भी उसे सुन न सकी

पर मेरा दिल सुन गया।


ये कैसा रिश्ता है हमारा?

जहाँ “आई लव यू”

कभी कहा ही नहीं गया,

फिर भी हर पल

वो महसूस होता रहा।


तुम्हारी खामोशी में

एक अजीब-सी गर्माहट है

जैसे सर्द रात में

बिना आग के भी

कोई दिल को गर्म रख दे।


तुम चुप रहकर भी

सब कह जाती हो,

और मैं सुनकर भी

कुछ कह नहीं पाता


क्योंकि जो एहसास

शब्दों में आ जाए,

वो इतना गहरा नहीं होता

और हमारा प्यार तो

समंदर से भी गहरा है।


जब तुम पास होती हो,

तो बातों की जरूरत नहीं पड़ती

बस तुम्हारा होना ही

एक पूरी बातचीत बन जाता है।


तुम्हारी सांसों की लय,

मेरे दिल की धड़कन से

मिल जाती है

और हम दोनों

एक ही गीत बन जाते हैं।


वो गीत…

जिसे कोई सुन नहीं सकता,

पर हम दोनों

हर पल गुनगुनाते हैं।


तुम्हारी खामोशी

मेरी सबसे प्यारी आवाज़ है

जिसमें कोई शोर नहीं,

कोई दिखावा नहीं,

बस सच्चाई है।


तुमने कभी वादा नहीं किया,

पर हर बार

तुम्हारी आँखों ने

मुझे यकीन दिलाया

कि तुम हो…

और हमेशा रहोगी।


तुम चुप रहकर भी

सब कह जाती हो

और यही तुम्हारी

सबसे खूबसूरत आदत है।


कभी-कभी

जब हम साथ बैठते हैं,

तो वक्त भी

धीरे चलने लगता है

जैसे वो भी

हमारी खामोशी को

समझना चाहता हो।


चुप रहकर भी सब कह जाना


तुम्हारी उंगलियाँ

जब मेरी उंगलियों को छूती हैं,

तो कोई शब्द नहीं होता

पर उस स्पर्श में

पूरी दुनिया बस जाती है।


तुम्हारी एक हल्की-सी मुस्कान,

मेरे सारे सवालों का जवाब बन जाती है

बिना कुछ कहे

तुम मुझे समझा देती हो।


और मैं…

बस तुम्हें देखता रह जाता हूँ,

जैसे कोई किताब

जिसे पढ़ने के लिए

शब्दों की जरूरत नहीं।


तुम एक एहसास हो,

जो बोला नहीं जाता

बस महसूस किया जाता है।


कभी तुम्हारी खामोशी

मुझे डराती भी है

क्योंकि उसमें

इतनी गहराई है

कि मैं उसमें

खो जाने से डरता हूँ।


पर फिर सोचता हूँ

अगर खोना है,

तो तुम्हारी खामोशी में ही खो जाऊँ।


तुम्हारी आँखें

हर बार एक नया सवाल पूछती हैं

और मैं हर बार

बिना बोले जवाब दे देता हूँ।


ये कैसी भाषा है हमारी?

जिसमें अल्फाज़ नहीं,

फिर भी हर बात पूरी होती है।


तुम चुप रहकर भी

सब कह जाती हो

और मैं

हर बार सुन लेता हूँ।


जब तुम दूर होती हो,

तो तुम्हारी खामोशी

और भी ज्यादा सुनाई देती है

जैसे कोई सन्नाटा

जो सिर्फ तुम्हारा नाम पुकारता हो।


तुम्हारी यादें

मेरे चारों ओर

एक खामोश धुंध बना देती हैं

जिसमें मैं

खुद को खो देता हूँ।


और उस धुंध में भी

तुम्हारी आवाज़ नहीं,

तुम्हारा एहसास होता है।


तुमने कभी कहा नहीं

कि तुम मुझसे प्यार करती हो

पर तुम्हारी हर नजर,

हर मुस्कान,

हर खामोशी ने

ये बात मुझे समझा दी।


और शायद…

यही सच्चा प्यार है।


जहाँ इज़हार की जरूरत नहीं,

जहाँ वादों की भी जरूरत नहीं

बस एक एहसास

जो बिना कहे

सब कुछ कह देता है।


तुम मेरी वो कविता हो

जिसे पढ़ने के लिए

दिल चाहिए

दिमाग नहीं।


तुम वो धुन हो

जो सुनाई नहीं देती,

पर महसूस होती है


तुम वो खामोशी हो

जिसमें मेरी पूरी दुनिया बसती है।


तुम चुप रहकर भी

सब कह जाती हो

और मैं

हर बार

तुम्हारे उस अनकहे प्यार में

खुद को पा लेता हूँ।


कभी अगर

तुम सच में कुछ कह दोगी,

तो शायद

उसका जादू टूट जाएगा

क्योंकि जो अनकहा है,

वही सबसे खूबसूरत है।


इसलिए…

तुम यूँ ही चुप रहो,

और मैं यूँ ही

तुम्हें सुनता रहूँ।


क्योंकि इस खामोशी में ही

हमारा सबसे सच्चा रिश्ता है

जो शब्दों से परे है,

समय से परे है,

और हर सीमा से परे है।


तुम चुप रहकर भी

सब कह जाती हो

और मैं

हर बार

तुम्हें सुनकर

और ज्यादा तुम्हारा हो जाता हूँ।


ये प्यार

शोर नहीं करता,

ये बस

धीरे-धीरे

दिल में उतर जाता है।


और एक दिन

इतना गहरा हो जाता है

कि उसे कहने की जरूरत ही नहीं रहती।

तुम्हारी खामोशी

मेरी सबसे बड़ी ताकत है

और मेरा सबसे प्यारा डर भी।


क्योंकि अगर ये खामोशी

कभी टूट गई,

तो शायद

मैं खुद को खो दूँ।


पर तब तक…

जब तक तुम कुछ नहीं कहती

मैं तुम्हारे हर एहसास को

सुनता रहूँगा,

महसूस करता रहूँगा,

और तुम्हें

हर खामोशी में

प्यार करता रहूँगा।


चुप रहकर भी सब कह जाना

तुम चुप रहकर भी

सब कह जाती हो

और यही

हमारे प्यार की

सबसे खूबसूरत सच्चाई है।

 

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