गलत समय पर सही इंसान

 ** गलत समय पर सही इंसान **


गलत समय पर सही इंसान


तुम सही थे…

इसमें कभी कोई शक नहीं था,

शक तो बस वक़्त पर था

जो हमें

गलत मोड़ पर मिला गया।


हमारी कहानी

किसी किताब की तरह नहीं थी,

जिसमें सब कुछ

ठीक समय पर लिखा जाए

ये तो जैसे

किसी बिखरे हुए पन्नों की दास्तान थी,

जहाँ हर पन्ना सही था,

बस क्रम गलत था।


तुमसे मिलना

मेरे जीवन की सबसे खूबसूरत गलती था

या शायद

सबसे सच्ची सज़ा।


क्योंकि तुम वो इंसान थे

जिसे मुझे पाना चाहिए था,

पर उस समय

जब मैं तुम्हें संभाल नहीं सकता था।


तुम्हारी मुस्कान में

वो सुकून था

जो मेरी दुनिया को बदल सकता था

पर मेरी दुनिया उस वक़्त

खुद ही बिखरी हुई थी।


तुम आए

जैसे कोई रौशनी

अंधेरे कमरे में प्रवेश करती है

पर मेरी आँखें

उस रोशनी की आदी नहीं थीं।


मैंने तुम्हें देखा,

महसूस किया,

चाहा भी

पर तुम्हें थामने की हिम्मत

मेरे पास नहीं थी।


तुम सही थे,

पर मैं तैयार नहीं था।

और यही हमारी कहानी का

सबसे बड़ा दर्द है।


तुमने मुझे समझा,

हर खामोशी को पढ़ा,

हर टूटन को महसूस किया

पर मैं…

मैं खुद को ही नहीं समझ पाया।


तुम मेरे लिए

सब कुछ बन सकते थे,

पर मैं तुम्हारे लिए

कुछ भी नहीं बन पाया।


क्योंकि वक़्त

हमारे साथ नहीं था


कहते हैं

प्यार सब कुछ ठीक कर देता है

पर कोई ये क्यों नहीं कहता

कि सही वक़्त भी जरूरी होता है?


तुम मेरे जीवन में आए

जब मैं खुद से लड़ रहा था

जब मेरे अंदर

इतना शोर था

कि तुम्हारी आवाज़

सुनाई ही नहीं दी।


तुमने मेरा हाथ थामा,

पर मैं

अपने ही अंधेरों में खोया रहा।



तुमने मुझे रास्ता दिखाया,

पर मैं

चलने के लिए तैयार नहीं था।


और फिर…

एक दिन

तुम चले गए।


बिना किसी शोर के,

बिना किसी शिकायत के

जैसे तुम आए थे,

वैसे ही चुपचाप।


और मैं…

बस खड़ा रह गया

अपने ही फैसलों के सामने

एक हार की तरह।


अब जब सब कुछ

थोड़ा ठीक हुआ है,

जब मैं खुद को

थोड़ा समझ पाया हूँ

तब तुम नहीं हो।


अब मैं तैयार हूँ,

पर तुम दूर हो।


यही तो है

गलत समय पर सही इंसान” की कहानी।


कभी-कभी

मैं सोचता हूँ

अगर हम थोड़ी देर बाद मिले होते,

या थोड़ा पहले

तो शायद

आज सब कुछ अलग होता।


शायद

तुम मेरे साथ होते,

शायद

मैं तुम्हारा होता।


गलत समय पर सही इंसान


पर ज़िंदगी

शायद” से नहीं चलती

वो तो

हकीकत के रास्ते पर ही चलती है।


और हमारी हकीकत

अधूरी है।


तुम्हारी यादें

अब भी मेरे साथ हैं

जैसे कोई अधूरा गीत

जो हर बार दिल को छू जाता है।


तुम्हारी हँसी

अब भी मेरे कानों में गूंजती है

जैसे कोई धुन

जो कभी खत्म नहीं होती।


तुम्हारा नाम

अब भी मेरे होंठों पर आता है

पर अब

कोई जवाब नहीं मिलता।


तुम सही थे…

पर समय गलत था


और शायद

यही वजह है

कि मैं तुम्हें भूल नहीं पाता।


क्योंकि जो गलत होता है,

उसे भुलाना आसान होता है

पर जो सही होकर भी

न मिल पाए,

वो हमेशा याद रहता है।


तुम मेरे जीवन का

वो सच हो

जिसे मैं जी नहीं पाया

और यही

मेरी सबसे बड़ी हार है।


अब जब मैं

किसी और से मिलता हूँ,

तो तुम्हारी कमी महसूस होती है

क्योंकि तुम जैसा

कोई नहीं होता।


तुम वो थे

जो मेरे हर अधूरेपन को समझते थे

और मैं…

मैं तुम्हारे पूरेपन को

संभाल नहीं पाया।


कभी-कभी

रात के सन्नाटे में

मैं खुद से पूछता हूँ

क्या हम फिर मिलेंगे?”

और जवाब में

बस खामोशी मिलती है।


शायद

किसी और समय में,

किसी और जन्म में

जहाँ हम दोनों

तैयार होंगे।


जहाँ वक़्त

हमारे खिलाफ नहीं,

हमारे साथ होगा।

गलत समय पर सही इंसान

जहाँ

तुम सही होगे,

और समय भी सही होगा।


पर इस जन्म में…

हम सिर्फ

एक कहानी हैं

जो सही होकर भी

अधूरी रह गई।


तुम मेरी सबसे खूबसूरत

गलती नहीं,

तुम मेरी सबसे सच्ची

कमी हो।


और शायद

मैं हमेशा

इस कमी के साथ ही

जीना सीख जाऊँगा


क्योंकि तुमसे मिलकर

मैंने जाना

कि प्यार क्या होता है।


और तुमसे बिछड़कर

मैंने समझा

कि वक़्त कितना जरूरी होता है।


तो अगर कभी

कहीं

हम फिर मिलें

तो मैं

इस बार तुम्हारा हाथ

छोड़ूंगा नहीं।


क्योंकि अब

मैं तैयार हूँ

और इस बार

मैं वक़्त से लड़ जाऊँगा।


पर तब तक

तुम जहाँ भी हो,

खुश रहना।

क्योंकि तुम सही थे

और सही लोग

हमेशा खुश रहने चाहिए।


और मैं…

मैं तुम्हें

अपनी हर धड़कन में

जिंदा रखूंगा।


क्योंकि तुम

मेरी वो मोहब्बत हो

जो गलत समय पर मिली,

पर हमेशा सही रहेगी… ❤️

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