# मेरी हर कविता तुम्हारे नाम
# मेरी हर कविता तुम्हारे नाम
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| # मेरी हर कविता तुम्हारे नाम |
जब भी कलम हाथों में आती है,
एक ही चेहरा आँखों में उतर आता है।
शब्द चाहे किसी भी दिशा में चल पड़ें,
उनका रास्ता आखिर तुम्हारे पास ही जाता है।
मेरी हर कविता तुम्हारे नाम है,
हर पंक्ति में तुम्हारा एहसास है।
जो कुछ भी मैंने लिखा है अब तक,
उसमें बस तुम्हारा ही वास है।
तुमसे मिलने से पहले,
शब्द तो थे मगर अर्थ नहीं थे।
गीत तो थे मगर उनमें धड़कन नहीं थी,
रातें तो थीं मगर उनमें चाँदनी नहीं थी।
फिर तुम आईं...
और जैसे किसी सूखे पेड़ पर
अचानक बहार आ गई हो।
जैसे वीरान रास्तों पर
फूलों की कतार लग गई हो।
तुम्हारे आने के बाद
मेरी दुनिया बदलने लगी।
खामोशियाँ गीत बनने लगीं,
तन्हाइयाँ साथी बनने लगीं।
जब पहली बार तुम्हारा नाम
मेरे होंठों पर आया था,
ऐसा लगा जैसे किसी मंदिर में
पहली बार दीप जलाया था।
तुम्हारी हँसी में मुझे
सारी खुशियों का पता मिला।
तुम्हारी आँखों में झाँका तो
अपना ही खोया हुआ खुदा मिला।
आज भी जब शाम ढलती है,
और सूरज थककर सो जाता है,
मेरा मन तुम्हारी यादों का दीपक
धीरे-धीरे फिर से जलाता है।
तुम्हें शायद कभी एहसास न हो,
पर मेरी हर धड़कन में तुम रहती हो।
मैं चाहे दुनिया से कुछ भी कहूँ,
अपने दिल से सिर्फ तुम्हारी बातें करता हूँ।
कभी-कभी लगता है कि
मोहब्बत कोई कहानी नहीं,
बल्कि एक प्रार्थना है।
जिसमें इंसान खुद को भूलकर
किसी और के लिए जीना सीख जाता है।
मैंने भी यही सीखा तुमसे।
तुम्हारी खुशी में अपनी खुशी ढूँढ़ना,
तुम्हारे दर्द में अपनी आँखें भिगोना।
तुम्हारे सपनों को अपना बनाना,
और तुम्हारे लिए हर पल दुआ करना।
कितनी अजीब बात है ना...
दुनिया लाखों लोगों से भरी है,
फिर भी दिल को बस एक ही नाम याद रहता है।
हजारों चेहरे सामने आते हैं,
लेकिन आँखें सिर्फ तुम्हें तलाशती हैं।
जब बारिश की पहली बूंद गिरती है,
मुझे तुम्हारी याद आती है।
जब हवा धीरे-धीरे बहती है,
उसमें तुम्हारी आवाज़ सुनाई देती है।
जब चाँद आसमान में निकलता है,
उसमें तुम्हारा चेहरा दिखता है।
और जब रात बहुत गहरी हो जाती है,
तब तुम्हारी कमी सबसे ज्यादा महसूस होती है।
तुम जानती हो?
मैंने कितनी कविताएँ लिखीं,
कितने गीत बनाए,
कितने शब्दों को सजाया।
लेकिन हर बार अंत में
कलम ने तुम्हारा नाम ही लिखा।
जैसे वह भी जानती हो
कि मेरी दुनिया की शुरुआत भी तुम हो
और अंत भी तुम।
कई बार सोचा कि
तुम्हें भूल जाऊँ।
तुम्हारी यादों को
दिल के किसी कोने में बंद कर दूँ।
लेकिन फिर एहसास हुआ कि
तुम्हें भूलना खुद को भूलने जैसा है।
क्योंकि अब मेरी पहचान में भी
तुम्हारा हिस्सा शामिल है।
तुम वह किताब हो
जिसे मैं बार-बार पढ़ता हूँ।
तुम वह गीत हो
जिसे सुनकर कभी मन नहीं भरता।
तुम वह सपना हो
जिसे आँखें खुलने के बाद भी
देखना चाहता हूँ।
और तुम वह कविता हो
जिसे मैं जीवन भर लिखना चाहता हूँ।
कभी अगर मेरी आवाज़
तुम तक पहुँचे,
तो जान लेना कि
उसमें सिर्फ शब्द नहीं होंगे।
उसमें वे सारे एहसास होंगे
जो मैंने बरसों से छुपा रखे हैं।
उसमें वह इंतज़ार होगा
जो हर शाम तुम्हारे लिए किया है।
उसमें वह प्रेम होगा
जो हर दर्द के बाद भी कम नहीं हुआ।
लोग कहते हैं कि
समय सब कुछ बदल देता है।
शायद सच कहते होंगे।
लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं
जो समय से भी मजबूत होती हैं।
जैसे तुम्हारी याद।
जैसे तुम्हारा नाम।
जैसे मेरा प्रेम।
आज भी जब कोई पूछता है
कि तुम्हारी सबसे बड़ी दौलत क्या है,
तो मैं मुस्कुरा देता हूँ।
क्योंकि उन्हें कैसे बताऊँ
कि मेरी सबसे बड़ी दौलत
कोई चीज़ नहीं,
एक एहसास है।
एक नाम है।
एक मोहब्बत है।
और वह मोहब्बत तुम हो।
यदि कभी मेरी जिंदगी की
आखिरी शाम आए,
और मुझसे पूछा जाए कि
तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है,
तो मैं बस इतना कहूँगा—
एक बार तुम्हारा नाम सुन लूँ,
एक बार तुम्हारी मुस्कान देख लूँ,
और एक बार तुम्हें यह बता दूँ कि
मेरी हर कविता तुम्हारे नाम थी।
हर शब्द तुम्हारे लिए था।
हर आँसू तुम्हारे लिए था।
हर दुआ तुम्हारे लिए थी।
और यह दिल...
यह दिल भी हमेशा
तुम्हारे नाम था।
क्योंकि प्रेम सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं होता।
प्रेम वह होता है
जो दूरी में भी जिंदा रहता है।
जो खामोशी में भी बोलता है।
जो बिछड़कर भी साथ चलता है।
और जो समय की हर परीक्षा के बाद भी
पहले दिन जितना ही सच्चा रहता है।
इसलिए आज फिर
कलम उठाई है मैंने।
आज फिर कुछ शब्द लिखे हैं।
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| # मेरी हर कविता तुम्हारे नाम |
और उन शब्दों के अंत में
एक बार फिर वही नाम लिखा है—
तुम्हारा नाम।
क्योंकि कल भी,
आज भी,
और जब तक साँसें चलेंगी,
मेरी हर कविता तुम्हारे नाम।
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