# अगर हम फिर से मिलें
# अगर हम फिर से मिलें
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| # अगर हम फिर से मिलें |
अगर हम फिर से मिलें,
किसी भीड़ भरी सड़क के किनारे,
या किसी पुराने शहर की तंग गलियों में,
जहाँ कभी हमने सपनों के घर बनाए थे,
तो क्या तुम मुझे पहचान पाओगी?
क्या तुम्हारी आँखें
मेरे चेहरे पर गुज़रे सालों की थकान पढ़ लेंगी,
या फिर मैं भी उन अनजान लोगों में शामिल हो जाऊँगा
जो बस आते हैं और गुज़र जाते हैं?
अगर हम फिर से मिलें,
तो शायद कुछ पल के लिए
समय भी ठहर जाएगा।
हवा अपनी रफ़्तार भूल जाएगी,
बादल अपने सफ़र को रोक देंगे,
और हमारी धड़कनें
वर्षों पुराने किसी गीत की तरह
फिर से गुनगुनाने लगेंगी।
मैं तुम्हें देखूँगा,
ठीक वैसे ही
जैसे आख़िरी बार देखा था।
फर्क बस इतना होगा
कि उस दिन हमारी आँखों में बिछड़ने का दर्द था,
और इस दिन
बरसों की चुप्पियों का बोझ होगा।
तुम शायद मुस्कुरा दोगी,
एक हल्की सी मुस्कान,
जिसमें हजारों अनकहे सवाल छिपे होंगे।
और मैं...
मैं शायद कुछ भी न कह पाऊँ।
क्योंकि कुछ रिश्ते
इतने गहरे होते हैं
कि शब्द उनके सामने छोटे पड़ जाते हैं।
अगर हम फिर से मिलें,
तो मैं तुमसे पूछना चाहूँगा—
क्या तुम्हें अब भी याद है
वो बारिश की शाम?
जब हम भीगते हुए
एक ही छतरी के नीचे चल रहे थे,
और दुनिया हमें देख रही थी,
लेकिन हमें दुनिया से कोई मतलब नहीं था।
क्या तुम्हें याद है
वो अधूरी बातें,
वो छोटे-छोटे झगड़े,
वो रूठना और फिर मान जाना?
या समय ने
सब कुछ मिटा दिया?
मुझे तो आज भी याद है।
तुम्हारी हँसी,
तुम्हारी आवाज़,
तुम्हारा मेरा नाम पुकारना,
सब कुछ।
जैसे कल की ही बात हो।
लेकिन शायद तुम्हारे लिए
यह सब एक पुरानी कहानी बन चुका हो।
अगर हम फिर से मिलें,
तो मैं तुम्हें बताना चाहूँगा
कि तुम्हारे जाने के बाद
मैंने जीना तो सीख लिया,
लेकिन खुश रहना नहीं।
मैंने लोगों की भीड़ में खुद को खोया,
काम में खुद को डुबोया,
नई राहें चुनीं,
नए चेहरे देखे,
लेकिन तुम्हारी जगह
कभी कोई नहीं ले सका।
हर खुशी अधूरी लगी,
हर जीत फीकी लगी,
क्योंकि उसमें तुम्हारी मौजूदगी नहीं थी।
कई बार लगा
कि तुम्हें भूल जाऊँ।
लेकिन यादें भुलाने से नहीं,
जीने से कम होती हैं।
और मैंने उन्हें जीया।
हर रात,
हर अकेलेपन में,
हर टूटे हुए सपने के साथ।
अगर हम फिर से मिलें,
तो शायद मैं तुमसे माफ़ी माँगूँ।
उन गलतियों के लिए
जो मैंने की थीं।
उन शब्दों के लिए
जो गुस्से में कह दिए थे।
उन पलों के लिए
जब मुझे तुम्हारा साथ देना चाहिए था,
लेकिन मैं अपने अहंकार में खो गया।
मुझे नहीं पता
तुमने मुझे माफ़ किया या नहीं।
लेकिन मैंने खुद को
आज तक माफ़ नहीं किया।
क्योंकि कुछ गलतियाँ
वक्त के साथ पुरानी नहीं होतीं,
वे सिर्फ़ दिल में और गहरी उतर जाती हैं।
अगर हम फिर से मिलें,
तो मैं जानना चाहूँगा—
क्या तुम भी कभी
मेरी तरह जागी हो रातों में?
क्या तुम्हें भी कभी
किसी गीत ने मेरी याद दिलाई?
क्या किसी बारिश ने
तुम्हें भी अतीत में ले जाकर खड़ा कर दिया?
या फिर तुमने सचमुच
मुझे पीछे छोड़ दिया?
अगर ऐसा है,
तो मैं खुश हूँ।
क्योंकि प्रेम का मतलब
सिर्फ़ पाना नहीं होता।
कभी-कभी
प्रेम का मतलब यह भी होता है
कि जिसे चाहो,
वह खुश रहे।
चाहे तुम्हारे बिना ही क्यों न रहे।
अगर हम फिर से मिलें,
तो मैं तुम्हारी आँखों में देखूँगा।
और शायद वहाँ
वही पुरानी चमक ढूँढ़ूँगा
जो कभी मेरे लिए हुआ करती थी।
लेकिन अगर वह चमक
अब किसी और के लिए हो,
तो भी मैं मुस्कुरा दूँगा।
क्योंकि प्रेम स्वार्थ नहीं,
समर्पण है।
और सच्चा प्रेम
किसी को बाँधता नहीं,
उसे उड़ने की आज़ादी देता है।
अगर हम फिर से मिलें,
तो शायद हम
पुरानी यादों पर हँसेंगे।
उन बेवकूफियों पर,
उन सपनों पर,
जो हमें उस समय दुनिया के सबसे बड़े सच लगते थे।
हम याद करेंगे
कैसे हमने भविष्य की योजनाएँ बनाई थीं।
एक छोटा सा घर,
खिड़की पर रखे फूल,
और ढेर सारी शामें
जो हमने साथ बिताने की कल्पना की थी।
लेकिन ज़िंदगी ने
हमारे लिए कुछ और लिखा था।
हमारी कहानी
अधूरी रह गई।
फिर भी,
वह खूबसूरत थी।
क्योंकि हर प्रेम कहानी
मंज़िल तक पहुँचकर ही महान नहीं बनती।
कुछ कहानियाँ
रास्तों में बिछड़कर भी अमर हो जाती हैं।
अगर हम फिर से मिलें,
तो शायद हम यह समझ पाएँगे
कि उस समय हम गलत नहीं थे।
हम बस अधूरे थे।
हम प्यार करना जानते थे,
लेकिन उसे संभालना नहीं।
हम सपने देखना जानते थे,
लेकिन उनके लिए लड़ना नहीं।
और शायद इसी वजह से
हम एक-दूसरे को खो बैठे।
लेकिन आज,
इतने सालों बाद,
हम पहले से ज़्यादा समझदार हैं।
पहले से ज़्यादा शांत।
और शायद पहले से ज़्यादा अकेले भी।
अगर हम फिर से मिलें,
तो मैं कोई वादा नहीं करूँगा।
न यह कहूँगा
कि चलो फिर से शुरू करते हैं।
न यह कहूँगा
कि जो टूटा था उसे जोड़ देते हैं।
क्योंकि कुछ चीज़ें
टूटने के बाद जुड़ तो जाती हैं,
लेकिन पहले जैसी नहीं रहतीं।
मैं बस इतना कहूँगा—
धन्यवाद।
मेरी ज़िंदगी में आने के लिए।
मुझे प्रेम का अर्थ सिखाने के लिए।
मुझे यह समझाने के लिए
कि किसी का होना
कितना सुंदर होता है।
और उसका न होना
कितना दर्दनाक।
अगर हम फिर से मिलें,
तो शायद विदा लेते समय
आँखें नम होंगी।
लेकिन इस बार
उनमें शिकायतें नहीं होंगी।
न कोई गुस्सा,
न कोई सवाल।
बस एक शांति होगी।
एक स्वीकार होगा।
कि जो था,
वह सुंदर था।
जो नहीं हो सका,
वह हमारी किस्मत थी।
और जो यादें बची हैं,
वे हमारी सबसे कीमती दौलत हैं।
अगर हम फिर से मिलें,
तो शायद हम फिर से बिछड़ जाएँ।
लेकिन इस बार
दिल टूटेगा नहीं।
क्योंकि इस बार
हम समझ चुके होंगे
कि कुछ लोग
हमारी ज़िंदगी में हमेशा रहने के लिए नहीं आते।
वे आते हैं
हमें बदलने के लिए,
हमें बेहतर बनाने के लिए,
हमें प्रेम का असली अर्थ सिखाने के लिए।
और फिर चले जाते हैं।
लेकिन उनका असर
कभी नहीं जाता।
अगर हम फिर से मिलें,
तो मैं आख़िरी बार
तुम्हारी ओर देखूँगा।
और मन ही मन कहूँगा—
"मैंने तुम्हें कभी खोया ही नहीं।
तुम मेरी यादों में हो,
मेरी कविताओं में हो,
मेरी दुआओं में हो,
मेरे हर अधूरे गीत में हो।
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तुम वहाँ हो,
जहाँ समय भी नहीं पहुँच सकता।"
और फिर मैं मुस्कुरा दूँगा।
क्योंकि कुछ प्रेम कहानियाँ
मिलकर नहीं,
याद बनकर पूरी होती हैं।
और शायद हमारी कहानी भी
उन्हीं में से एक है।
अगर हम फिर से मिलें...
तो शायद इस बार
हम एक-दूसरे को पाने की कोशिश नहीं करेंगे।
हम बस एक-दूसरे को समझेंगे।
और यही समझ
हमारे प्रेम की सबसे सुंदर मंज़िल होगी।
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