तस्वीर से बातें
तस्वीर से बातें
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| तस्वीर से बातें |
दीवारों पर टंगी हुई,
एक तस्वीर मुस्काती है,
मेरे सूने से जीवन में,
यादों की बारिश लाती है।
जब भी दिल उदास होता,
जब आँखें नम हो जाती हैं,
मैं चुपके से उसके आगे,
अपनी बातें कह जाता हूँ।
तस्वीर से बातें करता हूँ,
हर रोज़ मैं शाम ढले,
जैसे कोई अपना बैठा हो,
मेरे बिल्कुल पास चले।
उसकी आँखों में सपने हैं,
उसकी हँसी में उजियारा,
वो तस्वीर ही तो बन गई,
मेरे जीवन का सहारा।
कभी पूछूँ, "कैसी हो तुम?"
कभी कह दूँ, "याद बहुत आती,"
कभी शिकायत भी कर लेता,
"क्यों मुझसे इतनी दूर जाती?"
तस्वीर कुछ नहीं कहती,
बस चुपचाप सुन लेती है,
मेरे मन की हर हलचल को,
बिना बोले समझ लेती है।
जब रात बहुत गहरी होती,
चाँद अकेला चलता है,
तब तस्वीर का चेहरा भी,
मेरे संग-संग जगता है।
मैं कहता हूँ, "देखो ना,
आज का दिन कैसा बीता,"
वो जैसे हँसकर कह देती,
"सब ठीक होगा, मत घबराना।"
कभी पुरानी यादें लेकर,
दिल के पन्ने खुल जाते,
बीते हुए वो प्यारे लम्हे,
आँखों में फिर बस जाते।
वो सावन की पहली बारिश,
वो हाथों का मिल जाना,
वो हँसते-हँसते चुप होना,
वो आँखों का झुक जाना।
सब कुछ तस्वीर में जैसे,
आज भी ज़िंदा रहता है,
समय बदल जाए चाहे,
पर प्यार वहीं ठहरता है।
मैं उससे कहता हूँ अक्सर,
"तुम बिन सब सूना-सूना,"
वो तस्वीर फिर मुस्काती,
जैसे कहती, "मत रोना।"
कभी सुबह की पहली किरण,
उस चेहरे को छू जाती,
तब लगता है जैसे वो,
मुझसे मिलने आ जाती।
कभी हवाएँ धीरे-धीरे,
उस तस्वीर को हिलाती हैं,
और मेरे दिल में आशा की,
नई लौ जगा जाती हैं।
मैं अपने सारे राज़ उसे,
बड़े प्यार से सुनाता हूँ,
जो दुनिया से कह न पाया,
उससे खुलकर बतलाता हूँ।
वो मेरे सपनों की रानी,
वो मेरी प्यारी कहानी,
उसकी यादों से महक उठती,
मेरे जीवन की रवानी।
जब कोई अपना दूर चला जाए,
और मिलना मुश्किल हो जाए,
तब तस्वीर ही बन जाती है,
जो दिल को दिल से मिलवाए।
कितनी अजीब है ये दुनिया,
लोग बदलते जाते हैं,
पर तस्वीरों में कैद चेहरे,
वैसे ही रह जाते हैं।
उनकी हँसी नहीं बदलती,
उनकी बातें नहीं बदलती,
वक़्त की आँधी लाख चले,
उनकी यादें नहीं बदलती।
मैं तस्वीर से पूछता हूँ,
"क्या तुम भी मुझे याद करती?"
वो चुप रहती है लेकिन,
दिल में हलचल कर देती।
कभी लगता है अभी अचानक,
फ्रेम से बाहर आ जाओगी,
मेरी सूनी राहों में,
फिर खुशियाँ बरसाओगी।
मैं घंटों बैठा रहता हूँ,
उस तस्वीर के सामने,
जैसे कोई मंदिर हो,
और वो मेरी आराधना में।
वो तस्वीर मेरी पूजा है,
वो तस्वीर मेरा गीत,
उसमें ही बसता है अब,
मेरे जीवन का संगीत।
जब दुनिया मुझसे रूठे,
जब कोई साथ न निभाए,
तस्वीर का चेहरा तब भी,
मुझे जीना सिखलाए।
वो कहती नहीं मगर,
उसकी आँखें बोलती हैं,
मेरे टूटे हुए मन को,
धीरे-धीरे जोड़ती हैं।
कभी लगता है तस्वीर भी,
मेरी राह तकती होगी,
मेरी तरह ही शायद वो,
चुपचाप सिसकती होगी।
मैं कहता हूँ, "बस एक बार,
सपनों में मिलने आ जाना,"
वो तस्वीर फिर मुस्काकर,
दिल को देती समझाना।
साल गुज़र जाएँ चाहे,
मौसम बदलते जाएँ,
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं,
जो दिल में ही बस जाएँ।
तस्वीर से बातें करना,
अब मेरी आदत बन गई,
उसकी यादों की छाँव तले,
मेरी दुनिया सज गई।
जब जीवन की राहों में,
अँधियारा घिर आता है,
तस्वीर का वो प्यारा चेहरा,
दीपक बन जगमगाता है।
वो दूर सही, पर दिल में है,
हर धड़कन में रहती है,
मेरी हर छोटी-बड़ी खुशी,
उससे होकर बहती है।
तस्वीर से बातें करते-करते,
रात कब ढल जाती है,
यादों की मीठी सरगम में,
हर पीड़ा खो जाती है।
मैं फिर कहता हूँ तस्वीर से,
"तुम मेरी सबसे प्यारी हो,"
वो चुप रहती है लेकिन,
लगता है जैसे हमारी हो।
जब तक साँसें चलती रहेंगी,
जब तक ये दिल धड़केगा,
तस्वीर से मेरा रिश्ता भी,
हर पल यूँ ही महकेगा।
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| तस्वीर से बातें |
तस्वीर से बातें करना,
शायद पागलपन कहलाए,
पर जिसने सच्चा प्यार किया,
वो इसका मतलब समझ पाए।
क्योंकि तस्वीर सिर्फ तस्वीर नहीं,
दिल का एक एहसास है,
उसमें छिपा हुआ पूरा का पूरा,
एक अनमोल इतिहास है।
इसलिए हर शाम मैं,
उसके पास चला जाता हूँ,
और दुनिया से दूर कहीं,
तस्वीर से बातें करता हूँ।
तस्वीर से बातें करता हूँ,
तस्वीर से बातें करता हूँ,
यादों के उस सुंदर घर में,
हर दिन उससे मिलता हूँ।
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