दिल की अदालत
दिल की अदालत
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| दिल की अदालत |
आज फिर दिल की अदालत में,
तेरा ही नाम पुकारा गया।
मेरी सांसों के गवाहों को,
तेरे सामने उतारा गया।
न कोई वकील था मेरा,
न कोई दलील थी पास।
बस आंखों में कुछ सपने थे,
और दिल में मिलने की आस।
जज बना बैठा था जमाना,
कठघरे में खड़ा था प्यार।
हर कोई मुझसे पूछ रहा था,
क्यों करता है उसका इंतजार?
मैं चुप था, सिर झुकाए बैठा,
शब्द कहीं खो से गए थे।
जो बातें तुझसे कहनी थीं,
आंसुओं में बह से गए थे।
दिल बोला धीरे-धीरे,
"मुझको अपना पक्ष रखने दो।
जिसे मोहब्बत कहते हैं,
उसकी सच्चाई कहने दो।"
मैंने चाहा उसको दिल से,
इसमें मेरा क्या कसूर?
उसकी हंसी में जन्नत देखी,
उसकी आंखों में था नूर।
जब पहली बार मिली थी वो,
सावन जैसा मौसम था।
दिल के सूने आंगन में,
खुशियों का पहला संगम था।
उसकी बातों में मिठास थी,
जैसे गुड़ की मीठी डली।
उसकी हंसी सुनते ही लगती,
जिंदगी फिर से खिली-खिली।
मैंने सपनों का घर सजाया,
उसको अपना मान लिया।
अपने हर छोटे-बड़े ख्वाब में,
उसका नाम लिख लिया।
लेकिन किस्मत को शायद,
ये मंजूर नहीं था यार।
एक छोटी सी गलतफहमी ने,
कर दिया सब कुछ बेकार।
कुछ बातें अधूरी रह गईं,
कुछ शब्द गलत समझे गए।
दो दिल जो एक थे कभी,
आज जाने क्यों बिछड़ गए।
दिल की अदालत में फिर,
यादों को गवाह बनाया गया।
हर हंसी, हर मुलाकात को,
सामने लाकर सुनाया गया।
यादें बोलीं, "सच कहते हैं,
ये प्यार बहुत सच्चा था।
उसकी हर धड़कन में बस,
एक उसी का किस्सा था।"
फिर आया वक्त जुदाई का,
आंखों में सावन भर आया।
जिसे अपना सब कुछ माना,
वही सबसे दूर नजर आया।
रातों को चांद से बातें कीं,
तारों से हाल सुनाया।
हर मोड़ पर उसकी यादों ने,
मुझको बहुत रुलाया।
दिल बोला, "जज साहब,
इतनी सी मेरी फरियाद।
प्यार किया था सच्चे मन से,
मत समझो इसे अपराध।"
अगर मोहब्बत गुनाह है,
तो मैं ये गुनाह हजार करूं।
उसकी खुशियों की खातिर,
अपना हर सपना वार करूं।
अदालत में सन्नाटा छाया,
सब सुनते रहे चुपचाप।
मेरे टूटे हुए दिल की,
दर्द भरी हर एक बात।
फिर उसकी याद सामने आई,
धीरे-धीरे मुस्काई।
जैसे सूखे खेतों पर,
बरखा की बूंदें छाई।
याद बोली, "वो भी रोई थी,
जब तुम उससे दूर हुए।
उसकी आंखों के सारे सपने,
एक पल में चूर हुए।"
वो भी चाहती थी तुमको,
बस कह नहीं पाई कभी।
दिल की बातों को अपने,
सह नहीं पाई कभी।
सुनकर ये दिल धड़क उठा,
जैसे फिर बहार आई।
उम्मीदों की सूनी डाली पर,
खुशियों की कली मुस्काई।
फिर किस्मत को बुलवाया गया,
उससे कारण पूछा गया।
क्यों दो दिलों के बीच में,
इतना फासला किया गया?
किस्मत हंसकर बोली,
"मेरा इसमें क्या दोष?
इंसानों की गलतफहमी ने,
बिखेर दिया सारा जोश।"
बात अगर कर लेते दोनों,
दिल की बात बता देते।
शायद आज ये अदालत,
लगने से बचा लेते।
सच है, रिश्ते टूटते नहीं,
बातों के होने से।
रिश्ते टूट जाते हैं अक्सर,
चुप्पी के बोने से।
दिल ने सिर झुकाकर सोचा,
गलती शायद मेरी थी।
जो बात कहनी चाहिए थी,
वो बात अधूरी थी।
मैंने दर्द छुपाया इतना,
कि वो समझ न पाई।
मेरी खामोशी को उसने,
नाराजगी बतलाई।
फिर आंखों ने गवाही दी,
आंसू बनकर बह निकलीं।
दिल की सारी बंद किताबें,
एक पल में खुल निकलीं।
आंखें बोलीं, "सच्चाई ये,
प्यार कभी कम न हुआ।
दूरी चाहे जितनी आई,
दिल उससे जुदा न हुआ।"
आज भी उसकी राहों में,
नजरें बिछी रहती हैं।
उसकी खुशियों की दुआएं,
लबों पर सजी रहती हैं।
अदालत में बैठे लोगों ने,
सच्चाई को पहचान लिया।
मेरे मासूम से दिल को,
बेगुनाह मान लिया।
फैसला सुनाने की घड़ी आई,
सबकी सांसें थम सी गईं।
उम्मीद और डर की राहें,
एक-दूजे में जम सी गईं।
जज ने मुस्काकर कहा,
"सुनो दिल के दीवाने।
सच्चे प्यार को दुनिया में,
मिलते हैं लाख बहाने।
जो दिल से प्यार निभाते हैं,
वो हार नहीं सकते।
सच्चे रिश्तों के दीपक,
आंधी से बुझ नहीं सकते।
अगर मोहब्बत सच्ची है,
तो एक दिन लौटेगी।
सूखी धरती की किस्मत में,
बरखा बनकर फूटेगी।"
फैसला सुनते ही जैसे,
दिल को चैन मिला।
बरसों बाद किसी प्यासे को,
मीठा सा नीर मिला।
मैं बाहर आया अदालत से,
चेहरे पर नई मुस्कान लिए।
दिल में फिर उम्मीदों का,
रंगीन सा जहान लिए।
आज भी उसका इंतजार है,
पर शिकायत कोई नहीं।
सच्चे प्यार की राहों में,
जल्दबाजी होती नहीं।
शायद वो फिर लौट आए,
शायद फिर मुलाकात हो।
टूटे हुए सपनों की फिर,
खुशियों से बरसात हो।
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| दिल की अदालत |
और अगर वो ना भी आए,
तो कोई गम नहीं होगा।
उसकी यादों का दीपक,
दिल में हरदम जलेगा।
क्योंकि प्यार पाने का नाम नहीं,
प्यार तो बस देना है।
अपनी खुशियों से बढ़कर,
किसी और को चुन लेना है।
दिल की अदालत ने मुझको,
इतना सबक सिखाया है।
सच्चा प्रेम वही होता है,
जो हर हाल निभाया है।
न रूठे वक्त से कभी,
न किस्मत को दोष दें।
दिल साफ रखकर हर रिश्ते में,
बस प्रेम का बीज बो दें।
जब भी जीवन में आए,
गलतफहमी का अंधियारा।
बातों का दीप जला देना,
हो जाएगा उजियारा।
यही फैसला दिल का है,
यही अंतिम फरमान।
सच्चे प्रेम से बढ़कर जग में,
न कोई धर्म, न सम्मान।
आज भी दिल की अदालत में,
तेरा ही नाम सुनाई देता है।
और हर फैसले के अंत में,
मेरा प्यार ही जीत जाता है।
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