गलती मेरी थी

 गलती मेरी थी


गलती मेरी थी


गलती मेरी थी, ये बात अब समझ में आई है,

जब तेरी हँसी की जगह मेरी दुनिया में तन्हाई है।

जिस दिल को अपनी धड़कनों से भी ज़्यादा चाहा था,

आज उसी दिल की ख़ामोशी मेरी सबसे बड़ी सज़ा बन आई है।


तू जब मेरे जीवन में आई थी,

तो जैसे सूनी राहों पर बहार आई थी।

हर सुबह तेरे नाम से शुरू होती थी,

हर रात तेरे ख़्वाबों में खो जाती थी।


तेरी बातों में जादू था,

तेरी मुस्कान में सुकून था।

तेरी आँखों में जो प्यार दिखता था,

वही मेरी दुनिया का सबसे हसीन जुनून था।


मगर न जाने मुझ पर कैसा घमंड छा गया,

अपने ही प्यार पर जैसे कोई पर्दा आ गया।

छोटी-छोटी बातों को मैंने बड़ा बना दिया,

और अपने ही हाथों खुशियों का घर जला दिया।


तू समझाना चाहती थी,

मैं सुनना नहीं चाहता था।

तू रिश्ता बचाना चाहती थी,

मैं झूठी जीत में खोया रहता था।


आज सोचता हूँ तो दिल रो पड़ता है,

हर याद का काँटा सीने में चुभता है।

काश उस दिन मैं चुप रह जाता,

तो शायद आज तू मेरे साथ मुस्कुराता।


याद है मुझे वो शाम,

जब तेरी आँखों में आँसू थे।

तेरे होंठ कुछ कहना चाहते थे,

मगर मेरे शब्द बहुत कड़वे थे।


मैंने गुस्से में वो बातें कह दीं,

जो कभी कहनी नहीं चाहिए थीं।

मैंने तेरे दिल को चोट पहुँचाई,

जो किसी अपने को देनी नहीं चाहिए थी।


तू चुपचाप सुनती रही,

और मैं अपनी आवाज़ ऊँची करता रहा।

तेरी पलकों से आँसू गिरते रहे,

और मैं अपने अहंकार में अंधा बना रहा।


उस दिन जीत तो मेरी हो गई थी,

पर हार भी मेरी ही हुई थी।

क्योंकि बहस मैं जीत गया था,

मगर तेरा भरोसा हार गया था।


आज जब आईने में खुद को देखता हूँ,

तो अपना चेहरा भी अजनबी लगता है।

जिस इंसान पर कभी गर्व था मुझे,

वही इंसान अब सबसे बड़ा दोषी लगता है।


तेरे बिना हर मौसम अधूरा है,

हर खुशी जैसे कहीं दूर खड़ी है।

चाँद भी अब फीका-फीका लगता है,

क्योंकि तेरी मुस्कान ही मेरी असली चाँदनी थी।


रातों को नींद नहीं आती,

बस तेरी यादें साथ निभाती हैं।

तकिए पर सिर रखता हूँ जब,

तो आँखें ख़ुद-ब-ख़ुद भीग जाती हैं।


कभी तेरे भेजे हुए संदेश पढ़ता हूँ,

कभी तेरी तस्वीरों को देखता हूँ।

हर तस्वीर मुझसे एक ही सवाल पूछती है,

कि आखिर मैंने ऐसा क्यों किया?


मेरे पास कोई जवाब नहीं होता,

बस पछतावे की लंबी कहानी होती है।

दिल हर बार यही कहता है,

कि गलती मेरी थी, सिर्फ मेरी थी।


काश समय को पीछे मोड़ पाता,

तो उस दिन तुझे रोक लेता।

तेरे आँसुओं को अपनी हथेली में छुपा लेता,

और हर शिकायत को प्यार से मिटा देता।


काश मैं अपने शब्द वापस ले पाता,

तो तेरे दिल को टूटने से बचा लेता।

काश मैं अपने अहंकार को छोड़ देता,

तो आज तुझे खोने से बच जाता।


अब हर सुबह एक उम्मीद लेकर आती है,

कि शायद तेरा कोई संदेश आएगा।

शायद तू एक बार फिर मेरी बात सुनेगी,

और मेरे पछतावे को समझ पाएगी।


मैं जानता हूँ कि माफ़ी आसान नहीं होती,

टूटे हुए भरोसे को जोड़ना आसान नहीं होता।

मगर मेरा दिल फिर भी दुआ करता है,

कि एक दिन तेरे दिल में मेरे लिए जगह होगी।


मैं तुझसे कोई शिकायत नहीं करता,

क्योंकि शिकायत का हक मैंने खो दिया है।

मैं तुझसे कोई सवाल नहीं करता,

क्योंकि जवाब देने का अधिकार भी खो दिया है।


मैं बस इतना कहना चाहता हूँ,

कि प्यार आज भी उतना ही है।

फर्क सिर्फ इतना है कि पहले गर्व ज़्यादा था,

और आज पछतावा ज़्यादा है।


तेरी हर मुस्कान याद आती है,

तेरी हर अदा याद आती है।

वो छोटी-छोटी बातें, वो नादान झगड़े,

सब कुछ आज भी याद आता है।


कभी-कभी लगता है तू सामने खड़ी है,

और मैं तुझसे माफ़ी माँग रहा हूँ।

मगर फिर हकीकत का एहसास होता है,

और मैं फिर अकेला रह जाता हूँ।


ये अकेलापन अब मेरा साथी बन गया है,

ये तन्हाई अब मेरी कहानी बन गई है।

हर धड़कन एक ही बात दोहराती है,

कि गलती मेरी थी, गलती मेरी थी।


अगर कभी मेरी आवाज़ तुझ तक पहुँचे,

तो मेरे आँसुओं की सच्चाई भी देखना।

मेरी गलतियों के पीछे छिपे प्यार को देखना,

और मेरे टूटे हुए दिल की गहराई भी देखना।


मैं आज भी तुझे वही सम्मान देता हूँ,

जो पहली मुलाक़ात में दिया था।

मैं आज भी तुझसे वही प्यार करता हूँ,

जो पहली बार दिल में जगा था।


शायद किस्मत हमें फिर मिलाए,

शायद कोई नई सुबह आए।

शायद तेरे दिल की नाराज़गी पिघल जाए,

और हमारा अधूरा सफर फिर से शुरू हो जाए।


लेकिन अगर ऐसा न भी हुआ,

तो भी मैं तुझे बद्दुआ नहीं दूँगा।

तेरी खुशियों के लिए दुआ करूँगा,

तेरी मुस्कान के लिए खुदा से प्रार्थना करूँगा।


क्योंकि सच्चा प्यार पाने का नाम नहीं,

बल्कि चाहने का नाम होता है।

और मैं तुझे हमेशा चाहता रहूँगा,

चाहे तू मेरे साथ रहे या नहीं।


गलती मेरी थी


आज इस कविता के हर शब्द में,

मेरे दिल का दर्द छिपा है।

हर पंक्ति में एक पछतावा है,

हर आँसू में तेरा नाम लिखा है।


और अंत में बस इतना ही कहूँगा—

अगर कभी मेरी कहानी लिखी जाए,

तो उसमें एक सबक ज़रूर लिखना।

कि प्यार में शब्द सोचकर बोलना,

क्योंकि एक कठोर वाक्य वर्षों का रिश्ता तोड़ सकता है।


और मेरी कहानी के आखिरी पन्ने पर,

सिर्फ एक ही पंक्ति लिखना—

"मैंने उसे बेइंतहा प्यार किया था,

मगर उसे खो दिया... क्योंकि गलती मेरी थी।"


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