तुम्हारे नाम की बारिश

 तुम्हारे नाम की बारिश

तुम्हारे नाम की बारिश

आज फिर आसमान पर
बादलों ने दस्तक दी है,
हवा में मिट्टी की वही खुशबू घुली है
जो कभी तुम्हारे आने की खबर लाती थी।

पहली बूंद जैसे ही
मेरी हथेली पर गिरी,
उसने धीरे से तुम्हारा नाम लिया,
और मेरा दिल
बरसों पीछे लौट गया।

बारिश तो हर साल आती है,
लेकिन मेरे लिए
हर बारिश का एक ही नाम है—
तुम।

तुम्हें याद है?
एक दिन हम भीगते हुए
उस पुराने रास्ते पर चले थे,
जहाँ पेड़ों की शाखाएँ
हमारे सिर पर छत बन गई थीं।

तुमने हँसते हुए कहा था—
"अगर कभी मैं दूर चला जाऊँ,
तो बारिश में मुझे ढूँढ़ लेना,
मैं हर बूंद में तुम्हें मिल जाऊँगा।"

उस दिन
मैंने तुम्हारी बात पर
हँसकर विश्वास कर लिया था।

आज समझ आया,
कुछ वादे पूरे नहीं होते,
लेकिन कुछ वादे
यादों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

अब जब भी बारिश होती है,
मैं छाता नहीं खोलता।

मैं चाहता हूँ
हर बूंद मेरे चेहरे को छुए,
क्योंकि शायद
उनमें से किसी एक बूंद में
तुम्हारी उँगलियों का स्पर्श छिपा हो।

कभी खिड़की के पास बैठकर
घंटों बारिश को देखता हूँ।

हर बूंद
जैसे कोई अधूरा खत हो,
जो आसमान ने
तुम्हारे नाम लिखा था।

हवा जब भी
बारिश की खुशबू लेकर आती है,
लगता है
तुमने फिर से
मेरे बालों को सहलाया है।

मैं आँखें बंद करता हूँ,
और तुम सामने खड़े दिखाई देते हो।

वही मुस्कान,
वही मासूम आँखें,
वही धीमी आवाज़
जो मेरे नाम को
दुनिया का सबसे सुंदर शब्द बना देती थी।

लेकिन आँखें खुलते ही
सिर्फ बारिश होती है।

और मैं…

फिर अकेला रह जाता हूँ।

कभी-कभी लगता है
बारिश भी मुझसे प्यार करती है।

वह जानती है
कि मैं रो नहीं सकता,
इसलिए
वह खुद बरसती है
ताकि मेरे आँसू
उसमें छिप जाएँ।

लोग कहते हैं—
"कितनी खूबसूरत बारिश है।"

और मैं सोचता हूँ—
"तुम्हारी यादें
आज फिर बहुत खूबसूरत हो गई हैं।"

तुम्हारे जाने के बाद
कई मौसम आए।

बसंत आया,
फूल खिले।

गर्मी आई,
सूरज तपता रहा।

सर्दियाँ आईं,
धुंध ने रास्ते ढँक दिए।

लेकिन बारिश…

बारिश कभी नहीं बदली।

वह आज भी
उसी तरह तुम्हारा नाम लेकर आती है।

मुझे आज भी
वह पहली बारिश याद है।

तुमने मेरी हथेली पकड़कर कहा था—

"देखो,
बारिश की हर बूंद
नई शुरुआत होती है।"

मैंने पूछा था—

"अगर किसी की कहानी अधूरी रह जाए तो?"

तुम मुस्कुराए थे।

"तब बारिश
उसे हर साल
फिर से लिखती है।"

शायद इसलिए
मेरी कहानी
आज भी खत्म नहीं हुई।

हर मानसून
उसे फिर से शुरू कर देता है।

मैंने कितनी बार
खुद को समझाया—

अब भूल जाओ।

अब आगे बढ़ो।

अब नई सुबह का इंतज़ार करो।

लेकिन दिल ने
हर बार एक ही जवाब दिया—

"जिसे बारिश याद रखे,
उसे इंसान कैसे भूल जाए?"

आज भी
जब सड़कें भीगती हैं,
मैं उसी पुराने मोड़ पर
कुछ देर रुक जाता हूँ।

शायद तुम
अचानक सामने आ जाओ।

शायद फिर से कहो—

"इतनी बारिश में भीग जाओगे।"

और मैं फिर वही जवाब दूँ—

"अगर तुम्हारे साथ भीगना हो,
तो पूरी उम्र भी कम है।"

लेकिन अब
वहाँ सिर्फ खामोशी होती है।

बारिश होती है।

और कुछ कबूतर
भीगे हुए पेड़ों पर बैठे रहते हैं।

कभी-कभी
मैं आसमान से शिकायत करता हूँ।

क्यों हर बार
तुम्हारा नाम लेकर बरसता है?

क्यों हर बूंद
मेरे दिल का दरवाज़ा खटखटाती है?

क्यों हर बादल
तुम्हारी आवाज़ बन जाता है?

आसमान कुछ नहीं कहता।

वह बस
और ज़ोर से बरसने लगता है।

जैसे उसके पास भी
मेरे सवालों का जवाब नहीं।

एक दिन
मैंने बारिश से पूछा—

"क्या तुमने उसे कहीं देखा है?"

बारिश मुस्कुराई।

उसने मेरे कंधे पर
एक बूंद रखी।

और धीरे से बोली—

"जिसे तुम खोज रहे हो,
वह अब तुम्हारी यादों में रहता है।"

उस दिन
मैं बहुत रोया।

लेकिन पहली बार
मेरे आँसू
मुझे बोझ नहीं लगे।

क्योंकि वे भी
बारिश का हिस्सा बन गए थे।

अब मैं समझ चुका हूँ—

प्रेम कभी खत्म नहीं होता।

वह रूप बदल लेता है।

कभी चिट्ठी बन जाता है।

कभी गीत बन जाता है।

कभी खामोशी बन जाता है।

और कभी…

बारिश बन जाता है।

अब हर बरसात में
मैं तुम्हें ढूँढ़ता नहीं।

मैं तुम्हें महसूस करता हूँ।

मिट्टी की खुशबू में।

ठंडी हवा में।

खिड़की पर गिरती बूंदों की आवाज़ में।

भीगे पेड़ों की पत्तियों में।

और अपने दिल की
हर धड़कन में।

तुम अब
मेरे सामने नहीं हो।

लेकिन मेरी हर बारिश में हो।

हर बादल में हो।

हर बिजली की चमक में हो।

हर इंद्रधनुष के रंग में हो।

लोग कहते हैं—

समय सब कुछ बदल देता है।

शायद सही कहते हैं।

समय ने
तुम्हें मेरी ज़िंदगी से दूर कर दिया।

लेकिन समय
बारिश से तुम्हारा नाम
कभी नहीं मिटा पाया।

आज भी
जब पहली बूंद गिरती है,

मैं मुस्कुरा देता हूँ।

क्योंकि मुझे पता है—

तुम कहीं न कहीं
इस बारिश के साथ
मुझे याद कर रहे होगे।


तुम्हारे नाम की बारिश


अगर सचमुच
कभी आत्माएँ
बादल बनती हैं,

तो यकीन है—

इस बरसात में
तुमने ही
आसमान को भेजा होगा।

ताकि मैं जान सकूँ—

दूरी चाहे कितनी भी हो,

सच्चा प्रेम
हर साल
बारिश बनकर लौट आता है।

इसलिए आज भी
जब बादल घिरते हैं,

मैं हाथ फैलाकर
उन बूंदों को अपने भीतर समेट लेता हूँ।

क्योंकि वे सिर्फ पानी नहीं,

वे तुम्हारे नाम की बारिश हैं।

और मैं…

ज़िंदगी भर
उसी बारिश में भीगना चाहता हूँ।


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